
रतलाम, 20 अक्टूबर . मध्यप्रदेश के जावरा से विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने विजयादशमी को अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का पर्व बताते हुए कहा कि यह पर्व हमें अहंकार और अनाचार के अंत की प्रेरणा देता है. उन्होंने जावरा के दशहरा मैदान में रियासत काल से चले आ रहे सार्वजनिक आयोजन की परंपरा का जिक्र किया.
विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने कहा, “विजयादशमी हमें प्रेरणा देता है. जब अहंकार बढ़ जाता है तो अनाचार बढ़ता है. उस अहंकार रूपी अनाचार का समापन करने वाला पर्व विजयादशमी हमें प्रति वर्ष निरंतर प्रेरणा देता है. परमपिता परमात्मा प्रभु श्रीराम को आराध्य मानकर हम सभी एकत्रित होकर मनोकामना करते हैं कि विश्व में शांति हो, सद्भाव हो, मर्यादा हो और हमारी अपनी जो संस्कृति है, उस संस्कृति के संस्कार बने रहें. समस्त जनों को, परिवार सहित, बहुत-बहुत शुभकामनाएं और मंगलकामनाएं.”
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि यहां सार्वजनिक स्थान पर यह आयोजन किया जाता है. हमारी आशा है, हमारा विश्वास है. दशहरा मैदान पर सार्वजनिक दशहरा उत्सव होता है. संस्था इसकी व्यवस्था करती है, लेकिन यह सार्वजनिक स्थान पर होने के कारण यहां नगरवासी भी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी उसी भाव के साथ आते हैं कि आज हमारे प्रभु श्रीराम रावण का वध करेंगे.
जावरा विधायक ने कहा कि आज प्रभु श्रीराम और रावण की सेनाओं का युद्ध देखेंगे. आज प्रभु श्रीराम और रावण के बीच किस प्रकार का युद्ध हुआ था, यह देखने के लिए लोग धर्म-भावना के साथ यहां पहुंचते हैं. इसलिए यहां बहुत बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है. उनका यहां आना होता है और इसी से धर्म एवं संस्कृति को मजबूती मिलती है. इसी से महसूस होता है कि हम धर्म के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं.
एक व्यक्ति ने कहा, “मैं अपनी और दशहरा उत्सव समिति की ओर से सभी नगरवासियों को बुराइयों पर अच्छाई की विजय के इस पर्व, अधर्म पर धर्म की विजय के पर्व विजयादशमी और नवरात्रि की अनेक-अनेक बधाइयां एवं शुभकामनाएं देता हूं. मैं प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करता हूं कि हमारे अंदर, समाज के अंदर, नगर में और देश में जितनी भी आसुरी शक्तियां और बुराइयां हैं, उनका नाश हो. नगर प्रगति करे, प्रदेश प्रगति करे और हमारा पूरा देश प्रगति करे. यही मेरी ईश्वर से प्रार्थना है.”
उन्होंने कहा कि जब जनसंख्या बढ़ी और अधिक लोग आने लगे, तब सुविधाओं को देखते हुए इसे यहां पर शुरू किया गया. इसके पहले यह आयोजन रियासत काल से होता आ रहा है और उसी परंपरा का निर्वहन आज भी किया जा रहा है. जिस प्रकार से आपने रामायण में पढ़ा है, उसी परंपरा का निर्वहन करने का हम यहां प्रयास करते हैं. इसमें अलग-अलग समाजों और पूरे नगर का सहयोग रहता है.
उन्होंने कहा कि जहां तक आपने पहले प्रश्न पूछा था कि यहां कितनी पब्लिक आती है, तो मैं आपको बताना चाहूंगा कि नगर का मुख्य आयोजन यही है और सबसे अधिक जनता यहीं आती है. हम लोग व्यवस्थाओं में लगे रहते हैं, लेकिन मैं मानता हूं कि बहुत अच्छी संख्या में लोग आते हैं, परिवार के साथ आते हैं और यहां आकर आयोजन का आनंद लेते हैं.
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