
New Delhi, 24 अक्टूबर . भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने जामिया में विरोध प्रदर्शन और राहुल गांधी की रैली पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग देश में भ्रम फैलाना चाहते हैं, इससे कुछ नहीं होने वाला है. राहुल गांधी की रैली से व्यापारियों को परेशानी होने वाली है.
मुख्तार अब्बास नकवी ने से बात करते हुए कहा कि यह चाहे जंतर-मंतर हो, चाहे जामिया हो, कुछ लोग उसको अराजकता का अम्यूजमेंट पार्क बनाना चाहते हैं, उद्दंडता का मनोरंजन मैदान बनाना चाहते हैं, तो इससे एक बात बहुत साफ है कि जो इनका प्रोटेस्ट डेमोक्रेटिक पैशन नहीं बल्कि डिस्ट्रक्टिव फैशन है. ऐसे लोग देश में अव्यवस्था और अस्थिरता पैदा हो और देश के बारे में पूरी दुनिया में कैसे भय और भ्रम का माहौल पैदा हो, इसके लिए काम करते हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम ग्रैंड ओल्ड पार्टी और उसके प्रॉक्सी पार्टनर मिलकर रहे हैं. आपने देखा है कि अभी जो जामिया में जो कुछ हुआ, वहां पर वह ‘आवाज दो हम एक हैं’ कहने के लिए कौन गया हुआ था? कांग्रेस पार्टी के लीडर्स वहां पहुंचे हुए थे. इसीलिए हमने कहा कि यह प्रोटेस्ट इनके लिए डेमोक्रेटिक पैशन नहीं है, बल्कि डिस्ट्रक्टिव फैशन बन गया है.”
भाजपा नेता ने कहा कि इस डिस्ट्रक्टिव फैशन के जरिए जामिया और जंतर-मंतर को इन लोगों ने आराजकता का स्थान बना दिया है. इस तरह का काम करके ये लोग सोचते हैं कि देश में कोई बहुत बड़ा काम कर पाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला है. इसी के चलते इनका बंटाधार भी होने वाला है.
कांग्रेस की रैली पर भाजपा नेता ने कहा कि इतना तो उनको समझना चाहिए कि देश में त्योहार का समय चल रहा है. अभी दीपावली होने वाली है, उससे पहले भी देश में कई कार्यक्रम होते हैं, इसका एक लंबा क्रम है. देश के लोगों के रंग में भंग करने का जो काम किया जा रहा है, उससे भी लोगों को बाहर आना चाहिए, जिससे देश में प्रदर्शन न हो.
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल द्वारा केरलम के Governor के ‘शाकाहारी रसोई’ वाले आदेश की आलोचना किए जाने पर कहा कि राजभवन में नहीं बन रहा है, राज्य में थोड़ी प्रतिबंध है. अब देखिए, एक चीज बहुत साफ है कि वो वेजिटेरियन हैं. जो लोग वहां पर नॉन-वेजिटेरियन थे, तो नॉन-वेजिटेरियन भी बनता होगा. आपको याद होगा कि एपीजे अब्दुल कलाम साहब जब देश के President थे तो उस समय President भवन में नॉन-वेजिटेरियन बनना बंद हो गया था. तो इसका मतलब यह नहीं है कि उस पर भी आप अपनी सियासत करो. नॉन-वेजिटेरियन राजभवन में बंद हुआ है, राज्य में नहीं बंद हुआ है. इतनी सी बात अगर अक्ल के दुश्मनों को समझ में नहीं आ रही है, तो क्या कर सकते हैं?
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