
New Delhi, 7 अक्टूबर . भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीता. 65 किग्रा फ्रीस्टाइल के एशियन चैंपियन ने कहा है कि जापान से लौटने के बाद, उन्होंने सबसे ज्यादा मां के हाथ का बना चूरमा और खीर खाई है.
सुजीत कलकल ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान के एक सवाल के जवाब में कहा, “मैं ट्रेनिंग और कॉम्पिटिशन की वजह से घर से दूर रहता हूं, ऐसे में मां के हाथ का चूरमा बहुत याद आता है. एशियन गेम्स के बाद जैसे ही मैं लौटा, मेरी मां ने चूरमा और खीर भेजी. मैं घर से दूर सोनीपत में ट्रेनिंग करता हूं, इसलिए मेरी मां मेरे लिए ये चीजें भेजती रहती हैं. जापान से लौटने के बाद, मैंने सबसे ज्यादा चूरमा और खीर खाई है.”
सुजीत 2026 सीजन में अब तक अजेय रहे हैं. उन्होंने 2025 अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप और 2026 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप 65 किग्रा कैटेगरी में जीती थीं. उन्होंने फरवरी में अल्बानिया में यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग सीरीज में भी गोल्ड मेडल जीता.
उनकी सफलता कुछ मुश्किलों के बाद मिली. 2023 में, उन्हें 2023 एशियन गेम्स में जगह के लिए फेयर ट्रायल पाने के लिए हाई कोर्ट का कानूनी रास्ता अपनाना पड़ा. उस समय इंडियन रेसलिंग चला रही एड हॉक कमेटी ने बजरंग को टीम में सीधे एंट्री दे दी थी.
बाद में, अप्रैल 2024 में, जब सुजीत साथी रेसलर दीपक पुनिया के साथ एशियन ओलंपिक क्वालीफायर के लिए बिश्केक जा रहे थे, तो रिकॉर्ड बारिश और बाढ़ ने यूएई में फ्लाइट ऑपरेशंस में रुकावट पैदा की और दोनों Dubai में फंस गए. आखिरकार वे सुबह का वेट-इन शुरू होने के कुछ ही समय बाद बिश्केक पहुंचे, लेकिन आयोजकों ने उन्हें मुकाबला करने की इजाजत नहीं दी.
2023 में कोर्ट में अपने हक के लिए लड़ने वाले सुजीत को क्या कहेंगे? इस सवाल के जवाब में सुजीत ने कहा, “खुद पर भरोसा रखो और मेहनत करते रहो. भगवान इंसाफ में देर कर सकते हैं, लेकिन उसे कभी मना नहीं किया जा सकता. अगर हम बीते कल में फंसे रहेंगे, तो हमारा वर्तमान खराब होगा, और हम भविष्य में भी अच्छा नहीं कर पाएंगे. जो बीत गया, उसे जाने दो.”
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पीएके
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