
चंडीगढ़, 6 अक्टूबर . पंजाब के Chief Minister भगवंत मान से जुड़े परिसरों में सीबीआई की कार्रवाई को लेकर शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने आम आदमी पार्टी और पंजाब Government पर जुबानी हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई की कार्रवाई से पंजाब में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं और जांच आगे बढ़ने पर पूरा मामला और बड़ा हो सकता है.
दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सीबीआई की रेड ने पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने मई में हुई ईडी की कार्रवाई का जिक्र करते हुए Chief Minister के ओएसडी राजवीर सिंह के एक दोस्त के घर से बड़ी रकम बरामद होने और पैसे से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया. चीमा ने कहा कि उस समय भी भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठे थे.
उन्होंने कहा कि मंत्रियों के बंगलों में ईडी की कार्रवाई को लेकर भी कई बातें सामने आईं. उनका आरोप है कि दिल्ली के नेताओं की मौजूदगी और कथित समानांतर व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे. ईडी की ओर से तीन बार First Information Report दर्ज करने के लिए लिखे जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई. हाई कोर्ट ने भी Government से इस संबंध में जवाब मांगा था. चीमा ने कहा कि जब जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद कार्रवाई शुरू हुई तो उसके परिणाम सामने आने लगे हैं. उन्होंने दावा किया कि पंजाब से जुड़ा यह मामला आगे चलकर दिल्ली में सामने आए कथित घोटालों से भी बड़ा हो सकता है.
दलजीत सिंह चीमा ने पंजाब Government की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कथित भ्रष्टाचार केवल किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है. उन्होंने अधिकारियों की पोस्टिंग, नीतियों में बदलाव, हथियारों के लाइसेंस और टेंडर की शर्तों में बदलाव जैसे मामलों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अगर किसी नीति में बदलाव करवाना हो, किसी अधिकारी की पोस्टिंग करवानी हो या किसी टेंडर की शर्त बदलवानी हो, तो कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते हैं.
उन्होंने Chief Minister भगवंत मान के ‘कट्टर ईमानदार’ होने के दावों पर भी निशाना साधा. चीमा ने कहा कि एक तरफ Government ईमानदारी का दावा करती है, जबकि दूसरी तरफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई में गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं.
सीबीआई की कार्रवाई को पंजाब के खिलाफ कार्रवाई बताए जाने के आरोपों पर चीमा ने कहा कि भ्रष्टाचार की जांच को पंजाब के खिलाफ हमला नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि जब Government से First Information Report दर्ज कर कार्रवाई करने को कहा जा रहा था, तब उसने कार्रवाई क्यों नहीं की. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जांच की मांग पहले से की जा रही थी तो अब कार्रवाई होने पर इसे संविधान या पंजाब के खिलाफ हमला क्यों बताया जा रहा है. जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि पंजाब के साथ कथित तौर पर किस तरह का नुकसान हुआ.
चीमा ने आम आदमी पार्टी के उन नेताओं का भी जिक्र किया, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई हुई थी. उन्होंने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन जेल में थे, तब भी आम आदमी पार्टी उन्हें देशभक्त बताती रही. चीमा ने तंज कसते हुए कहा कि जेल से बाहर आने के बाद भी उन्हें पंजाब में लाकर महत्वपूर्ण भूमिका दी गई. पार्टी का यह दावा कि उसके नेता देश के लिए काम करने आए हैं, उसके नेताओं की कथित गतिविधियों के बावजूद लगातार दोहराया जाता रहा है.
सीबीआई की कार्रवाई के समय को चुनाव से जोड़ने पर चीमा ने कहा कि ऐसी कार्रवाई बहुत पहले होनी चाहिए थी. अगर जांच पहले शुरू होती तो पंजाब को कथित तौर पर हुए नुकसान को कम किया जा सकता था. लेकिन, देर से हुई कार्रवाई को भी सही दिशा में कदम माना जाना चाहिए. Government के आखिरी छह महीने भ्रष्टाचार करने की कोई छूट नहीं देते और अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो चुनाव से पहले या बाद में उसकी जांच होनी चाहिए. जांच आगे बढ़ने पर ही स्पष्ट होगा कि पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर क्या है और पंजाब में कथित भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी किसकी बनती है.
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