
jaipur, 16 अक्टूबर . Rajasthan के पूर्व जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) मंत्री महेश जोशी को जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले के मामले में Supreme Court से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने एसीबी मामले में जोशी और सह-आरोपी मुकेश पाठक को नियमित जमानत दे दी है.
Rajasthan की पिछली Government में मंत्री रहे जोशी इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से ही हिरासत में थे.
यह मामला ‘जल जीवन मिशन’ के तहत सैकड़ों करोड़ रुपए के सरकारी ठेके देने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. इन आरोपों में टेंडर देने के दौरान भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी शामिल है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने 12 अक्टूबर को महेश जोशी की जमानत याचिका पर दलीलें सुनीं और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब कोर्ट ने पूर्व मंत्री को जमानत दे दी है.
इससे पहले अगस्त 2026 में Rajasthan हाईकोर्ट ने जोशी और पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल सहित आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं. जस्टिस विपिन गुप्ता की एकल पीठ ने आरोपों की गंभीरता और राज्य के खजाने पर पड़ने वाले भारी वित्तीय असर का हवाला दिया था.
इसके बाद महेश जोशी ने एसीबी मामले में राहत पाने के लिए Supreme Court में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी. जेजेएम मामले में जोशी की कानूनी मुश्किलें कई एजेंसियों के सामने चल रही कार्यवाही से जुड़ी रही हैं. अप्रैल 2025 में, Enforcement Directorate (ईडी) ने उन्हें घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया.
लगभग सात महीने हिरासत में बिताने के बाद 3 दिसंबर 2025 को Supreme Court ने उन्हें नियमित जमानत दे दी. कोर्ट ने उनके जेल में बिताए समय और उनकी उम्र (जो उस समय 71 वर्ष बताई गई थी) को ध्यान में रखा.
7 मई 2026 को Rajasthan एसीबी ने जोशी को उनके jaipur स्थित आवास से फिर से गिरफ्तार कर लिया. यह गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के एक अलग मामले में हुई, जो 900 करोड़ रुपए से अधिक के टेंडरों में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी से जुड़ा था.
Supreme Court से जमानत मिलने तक वह एसीबी मामले में हिरासत में रहे. ‘जल जीवन मिशन’ Government की एक पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को चालू नल-जल कनेक्शन उपलब्ध कराना है. Rajasthan में इस योजना को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य Government ने काफी खर्च किया है.
जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि ठेके देने में गड़बड़ियां हुई हैं. इनमें जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल, कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाना और अधिकारियों तथा बिचौलियों द्वारा रिश्वत लेना शामिल है.
परियोजनाओं में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं. इन गड़बड़ियों की जांच ईडी और Rajasthan एसीबी अपने-अपने मामलों के तहत कर रही हैं.
Supreme Court के जमानत आदेश से जोशी को एसीबी मामले में राहत मिली है, हालांकि जमानत मिलने का मतलब दोषमुक्ति नहीं है और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा बने रहेंगे.
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एएसएच/
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