
जम्मू, 1 सितंबर . एमबीबीएस और बीडीएस इंडर्न डॉक्टरों की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग और स्वास्थ्य मंत्री से अपनी समस्याओं का जल्द समाधान करने की अपील करते हुए Wednesday को दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है.
से बातचीत करते हुए डॉक्टर तनिशा महाजन ने कहा कि बीते कई वर्षों से हमको भरोसा दिया जा रहा है. 2025 में भी हमको बताया गया था कि हमारी फाइल अंडर प्रोसेस है, लेकिन फाइल कहां है, हमें अभी तक नहीं पता है. अब हमको वादा नहीं चाहिए. जब तक स्टाइपेंड बढ़ाए जाने का रिटेन ऑर्डर नहीं मिल जाता है, तब तक हम लोगों का प्रदर्शन जारी रहेगा. शिक्षा मंत्री सकीना इटू की ओर से बयान दिया गया है कि हमारी फाइल अंडर प्रोसेस है, लेकिन उनका ये पहला बयान नहीं है.
डॉक्टर तनिशा महाजन ने आगे कहा कि अब हमको ये नहीं सुनना है कि हमारी फाइल अंडर प्रोसेस है. हम लोगों को स्टाइपेंड बढ़ाए जाने का रिटेन डॉक्यूमेंट चाहिए. सिर्फ यही एक कंडीशन है, जिसके बाद हम लोग वापस काम पर लौटेंगे. ऐसा न होना हमारे लिए चिंता का विषय है, क्योंकि हमारी ओर से 100 प्रतिशत दिया जा रहा है. ऐसे में हमारी भी Government से उम्मीद है कि वाजिब मांग का Government आदर करे. हम लोगों को स्टाइपेंड बढ़ाए जाने का पूरा भरोसा है.
डॉक्टर तानिश ने कहा कि जिस तरह से स्वास्थ्य मंत्री की ओर से बयान दिया गया है, इससे उन्होंने स्वीकार किया है कि हमारी मांग वाजिब है. लेकिन उन्होंने जो यह कहा कि हमारी ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को डिस्टर्ब किया जा रहा है, उनका यह बयान बिल्कुल गलत है. इमरजेंसी ड्यूटी में हम लोगों ने इंटर्नों को भेजा है. इमरजेंसी सेवाओं से हम लोगों की ओर से कोई कंप्रोमाइज नहीं किया जा रहा है. ओपीडी और नॉन इंमरजेंसी वाले इंटर्न यहां आए हैं. 2025 में भी स्टाइपेंड बढ़ाए जाने को लेकर बयान दिया गया था. उन्होंने कहा कि Government से हमारी यही विनती है कि जल्द से जल्द प्रोसेस पूरा किया जाए. अगर ऐसा नहीं होता है कि हम लोगों को President और Prime Minister को ओपन लेटर लिखना पड़ेगा.
डॉक्टर सज्जाद मुस्तफा ने कहा कि हम लोग कल से प्रदर्शन कर रहे हैं और हमारी कोई बड़ी डिमांड नहीं है. हमारी मांग हर महीने 30 हजार रुपए स्टाइपेंड का है. जिस तरह से हमको डॉक्टर के बराबर जिम्मेदारी दी जा रही है, उस तरह से हमें स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा है. हम लोग Government के खिलाफ नहीं हैं; हम अपने हक को मांगने आए हैं. जब तक हमारी मांग पूरी नहीं की जाती, तब तक हम ड्यूटी पर वापस नहीं लौटेंगे. Chief Minister को ही यह काम करना है; अगर वे ही हमारी बात नहीं सुनेंगे तो हम किसके पास जाएंगे.
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एसडी/पीएम
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