जम्मू-कश्मीर में 21 विधायकों की बैठक से सियासी हलचल, मेहराज मलिक ने महाराष्ट्र पैटर्न की दिलाई याद

जम्मू, 31 अक्टूबर . जम्मू-कश्मीर में Government की स्थिरता और कथित ऑपरेशन लोटस को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक मेहराज मलिक ने भाजपा पर सत्ता हासिल करने के लिए चुनी हुई Governmentों को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा की नजर जम्मू-कश्मीर पर लगी हुई है और पिछले कई महीनों से Government गिरने की चर्चाएं चल रही थीं. मलिक ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर हुई बैठकों और कैबिनेट विस्तार के बाद पैदा हुई परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए.

मेहराज मलिक ने कहा कि भाजपा जहां भी सत्ता हासिल करने की संभावना देखती है, वहां प्रयास करने से पीछे नहीं हटती. जम्मू-कश्मीर में Government को पर्याप्त समर्थन हासिल था. कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच Government को लेकर कोई तत्काल टूटने जैसी स्थिति नहीं थी. कैबिनेट विस्तार एक सामान्य प्रक्रिया थी, लेकिन इसके बाद 21 विधायकों की बैठक ने Political घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया. उन्होंने इस घटनाक्रम की तुलना Maharashtra में एकनाथ शिंदे के Political घटनाक्रम से की.

मलिक ने आशंका जताई कि कहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस में भी पार्टी के नेतृत्व और संगठन को लेकर वैसी स्थिति पैदा न हो जाए. उन्होंने फारूक अब्दुल्ला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अपनी पार्टी पर गर्व है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम में पार्टी के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ऐसे Political अवसरों की तलाश में रहती है और विधायकों से संपर्क करने और उन्हें अपने पक्ष में करने में माहिर है.

आप विधायक ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कैबिनेट विस्तार जनता के हितों के बजाय अपने और पार्टी के हितों को ध्यान में रखकर किया. विधायकों की बैठक में उमर अब्दुल्ला के सामने कुछ शर्तें और मांगें रखे जाने की बात सामने आई है. मंत्रिमंडल में शामिल किए गए लोगों का चयन वास्तव में जनता के हित में हुआ या Political और व्यक्तिगत हितों को ध्यान में रखकर किया गया. Government किसी की भी बने, सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आम लोगों के लिए जमीन पर क्या काम हो रहा है. उपGovernor शासन और भाजपा के दौर में भी आम आदमी को राहत नहीं मिली और व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. व्यवस्था बदलने के लिए अच्छे लोगों का राजनीति में आना और Government में जिम्मेदारी संभालना जरूरी है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सैयद आगा रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान पर मलिक ने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने के बजाय Government में रहकर सवाल उठाने चाहिए. रूहुल्लाह को जनता ने चुनकर संसद में भेजा है और जनता उनसे उम्मीद रखती है. यदि वह इस्तीफा दे देते हैं तो जम्मू-कश्मीर के मुद्दों को संसद में उठाने वाला एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि कम हो जाएगा. रूहुल्लाह ने यदि Government के सामने कोई सवाल या मांग रखी है तो उन्हें उसके जवाब के लिए Government के भीतर रहकर संघर्ष करना चाहिए. यदि इस्तीफा होता है तो चुनाव होने तक लंबा समय लग सकता है. ऐसे में उनका बने रहना जनता के हित में होगा. मौजूदा Political उथल-पुथल के बीच निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए.

उन्होंने विधायकों की अलग बैठक को लेकर भी सवाल उठाए. मलिक ने कहा कि यदि बैठक करनी थी तो फारूक अब्दुल्ला के घर या पार्टी कार्यालय में की जा सकती थी. उन्होंने दावा किया कि भाजपा पहले से ही विधायकों के संपर्क में होने के दावे करती रही है और ऐसे घटनाक्रम को ऑपरेशन लोटस के नजरिए से देखा जा सकता है. भाजपा चंडीगढ़ और बिहार सहित अलग-अलग जगहों पर इस तरह की Political कोशिशें करती रही है.

लव जिहाद की बहस पर मलिक ने कहा कि अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में आम लोगों और बड़े लोगों के लिए अलग-अलग रवैया अपनाया जाता है. उन्होंने कहा कि आम व्यक्ति के मामले में संगठनों और Political लोगों की ओर से विरोध तथा विवाद खड़ा किया जाता है, जबकि चर्चित हस्तियों के विवाह पर वैसी बहस नहीं होती. उन्होंने शाहरुख खान, आमिर खान का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़े लोगों के मामलों में सवाल नहीं उठाए जाते, जबकि आम लोगों को निशाना बनाया जाता है. जम्मू-कश्मीर के किसी बड़े चेहरे से जुड़े ऐसे मामले पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने फिलहाल नाम लेने से इनकार किया. मलिक ने कहा कि समय आने पर वह नाम भी बताएंगे और सवाल भी उठाएंगे. उन्होंने कहा कि समाज में नफरत फैलाने के लिए आम लोगों को मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए.

–