जम्मू-कश्मीर को अपनी जागीर समझता है अब्दुल्ला परिवार, जनता से किए वादे को पूरा नहीं किया : आगा रुहुल्लाह

New Delhi/श्रीनगर, 30 अक्टूबर . नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने Friday को जम्मू-कश्मीर के अब्दुल्ला परिवार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस परिवार ने जम्मू-कश्मीर को अपनी ‘जागीर’ समझ रखा है और जनता से किए गए अपने वादों को कभी पूरा नहीं किया.

आगा रुहुल्लाह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “युवराज और उनका गुट जम्मू-कश्मीर को अपनी पारिवारिक जागीर मानते हैं. वे चाहते हैं कि लोग वोट दें और फिर अपनी ‘औकात’ में रहें.” उन्होंने दोहराया कि वह 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और अपनी Lok Sabha सीट से इस्तीफा दे देंगे.

आगा रुहुल्लाह ने कहा कि अब्दुल्ला परिवार लोगों को मूर्ख समझता है, जो यह नहीं समझ सकते कि कौन सा वादा तोड़ा गया है और क्या केवल एक Political मजबूरी है.

उन्होंने कहा, “जब उनसे अपने ही घोषणापत्र का पालन करने के लिए कहा जाता है, तो वे हमें ही समझाने लगते हैं कि हम ‘रियलपॉलिटिक’ (व्यावहारिक राजनीति) को कितना कम समझते हैं.”

उन्होंने अनुच्छेद 370 को बहाल करने, कैदियों को रिहा करने और लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की अपनी मांगें भी दोहराईं.

उन्होंने कहा, “उन्होंने (अब्दुल्ला परिवार ने) इन वादों के दम पर सत्ता हासिल की, और फिर जब हमने उनसे वादे पूरे करने की उम्मीद की, तो हमें ही मूर्ख समझा. हम इस अपमान का हिस्सा नहीं बनना चाहते. इस सड़ी-गली व्यवस्था को भीतर से ठीक नहीं किया जा सकता.”

श्रीनगर के सांसद ने फारूक अब्दुल्ला और Chief Minister उमर अब्दुल्ला की कड़ी आलोचना करते हुए पवित्र कुरान की ‘सूरह अल-इसरा’ की आयत 17:24 का हवाला दिया. आगा रुहुल्लाह ने अब्दुल्ला परिवार को याद दिलाया, “अपने वादों को पूरा करें, क्योंकि आपसे निश्चित रूप से उनके बारे में जवाब मांगा जाएगा.”

उन्होंने आगे कहा कि श्रीनगर की उनकी सीट लोगों से किए गए एक वादे के आधार पर जीती गई थी.

उन्होंने कहा, “मैं इस वादे के साथ विश्वासघात करने में भागीदार बनने के बजाय, अपनी (श्रीनगर की) सीट छोड़ देना बेहतर समझता हूं.”

एनसी सांसद ने कहा कि वह 3 नवंबर को बडगाम के ‘बहिश्त-ए-जहरा पार्क’ में लोगों को संबोधित करेंगे और उनसे अपने कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करेंगे.

नेशनल कॉन्फ्रेंस और आगा रुहुल्लाह के बीच दरार तब पैदा हुई जब उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध किया, जो पार्टी नेतृत्व की ‘व्यावहारिक राजनीति’ से मेल नहीं खाता था.

अगस्त 2019 के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस की चुप्पी से खुद को अलग करते हुए, रुहुल्लाह ने 2020 में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता के पद से इस्तीफा दे दिया था.

2024 के चुनावों के बाद तनाव और बढ़ गया, जब रुहुल्लाह ने खुले तौर पर एनसी पर आरोप लगाया कि उसने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई छोड़ दी है और New Delhi के सामने केवल ‘राज्य का दर्जा’ पाने के लिए ‘भीख’ मांग रही है. यह विवाद तब चरम पर पहुंच गया जब फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें इस्तीफा देने की चुनौती दी.

रुहुल्लाह ने बडगाम उपचुनाव में प्रचार करने से इनकार करके पार्टी को एक और झटका दिया, और अंततः 3 नवंबर को उन्होंने एनसी और Lok Sabha से इस्तीफा देने का फैसला किया.

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एससीएच