जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य मंत्री से आश्वासन मिलने के बाद मेडिकल इंटर्न ने हड़ताल खत्म की

श्रीनगर, 9 सितंबर . जम्मू और कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू से स्टाइपेंड में 30 दिनों के अंदर बदलाव का भरोसा मिलने के बाद मेडिकल इंटर्न 9 दिन बाद Wednesday को अपनी ड्यूटी पर लौट आए.

Government के साथ बातचीत में गतिरोध इसलिए पैदा हुआ था, क्योंकि मेडिकल इंटर्न मांग कर रहे थे कि Government उन्हें औपचारिक आश्वासन दे.

सकीना इत्तू ने Tuesday शाम को विरोध कर रहे मेडिकल इंटर्न के प्रतिनिधियों को बातचीत के एक नए दौर के लिए बुलाया. बैठक के बाद यह तय हुआ कि Government, स्टाइपेंड बढ़ाने वाली समिति की सिफारिशों के अनुसार, 30 दिनों के भीतर इंटर्न के स्टाइपेंड में संशोधन करेगी.

स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई इस बैठक में मेडिकल इंटर्न के प्रतिनिधियों, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्रिंसिपल और कश्मीर के डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज का प्रतिनिधित्व करने वाले डिप्टी डायरेक्टर (प्लानिंग) शामिल हुए.

जम्मू-कश्मीर के एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न ने अपनी हड़ताल खत्म करने का फैसला तब किया जब Government ने “लिखित” आश्वासन दिया कि स्टाइपेंड का मुद्दा एक महीने के भीतर सुलझा लिया जाएगा.

इस आश्वासन के बाद इंटर्न ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी और काम पर लौट आए. श्रीनगर में बेमिना मेडिकल कॉलेज के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे मेडिकल इंटर्न ने भी अपना अनशन खत्म कर दिया और काम पर लौटने का फैसला किया.

मेडिकल इंटर्न अपने मासिक स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे थे. विरोध कर रहे इंटर्न का तर्क था कि रहने-सहने का खर्च कई गुना बढ़ जाने के बावजूद स्टाइपेंड 2019 से उतना ही बना हुआ था. मेडिकल इंटर्न इमरजेंसी, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर में काम करते हैं और अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखभाल करते हैं. वे जम्मू-कश्मीर में हेल्थकेयर सिस्टम का एक अहम हिस्सा हैं.

सीनियर डॉक्टरों ने मेडिकल इंटर्न की मांग का समर्थन किया था. डॉक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर (डीएके), जम्मू-कश्मीर डॉक्टर्स कोऑर्डिनेशन कमेटी (जेकीडीसीसी) जैसे संगठनों और Political हस्तियों ने लंबे समय तक काम करने और रहने-सहने के बढ़ते खर्च का हवाला देते हुए इस आंदोलन का समर्थन किया.

ओपी/पीएम