जमात के साथ गठबंधन से बांग्लादेश की एनसीपी की राजनीतिक पहचान पर उठे सवाल

ढाका, 2 अक्टूबर . बांग्लादेश में नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के जमात-ए-इस्लामी (जेआई) के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने के फैसले को लेकर उसकी Political पहचान पर सवाल उठ रहे हैं. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात के 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का विरोध करने और Pakistanी सेना का साथ देने के इतिहास को देखते हुए एनसीपी को इस गठबंधन की बड़ी Political कीमत चुकानी पड़ी है.

रिपोर्ट में कहा गया कि फरवरी में एनसीपी की पहली वर्षगांठ तक पार्टी के कम से कम 60 नेता और कार्यकर्ता उसे छोड़ चुके थे. जमात के साथ चुनावी गठबंधन को पार्टी की Political दिशा को लेकर अंदर चल रहे मतभेदों का सबसे स्पष्ट उदाहरण बताया गया है.

19 सितंबर को जमात के नेतृत्व वाले 11 दलों के विपक्षी गठबंधन की ओर से आयोजित लॉन्ग मार्च को संबोधित करते हुए एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम ने बांग्लादेश के Prime Minister तारिक रहमान पर तीखा हमला बोला था.

उन्होंने कहा था, ”उन्हें यह तय करना होगा कि वह हेलीकॉप्टर से देश छोड़कर भागेंगे या सम्मान के साथ इस्तीफा देंगे.”

महत्वपूर्ण बात यह है कि नाहिद यह बयान एनसीपी की रैली में नहीं, बल्कि जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन के लॉन्ग मार्च में दे रहे थे.

‘द डिप्लोमैट’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह लॉन्ग मार्च सात सूत्रीय मांगों को लेकर आयोजित किया गया था. इनमें फरवरी के जनमत संग्रह के फैसले को लागू करना, बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण, ऊर्जा और उर्वरक संकट से निPatna, बिगड़ती कानून-व्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाना शामिल था.

रिपोर्ट में कहा गया, ”बांग्लादेश में अब यह आम तस्वीर बन गई है कि एनसीपी जमात के साथ लॉन्ग मार्च, गठबंधन की बैठकों और संसद के विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होती है.”

एनसीपी का उदय उस छात्र आंदोलन से हुआ था, जिसके बाद अगस्त 2024 में अवामी लीग की Government सत्ता से बाहर हो गई थी. रिपोर्ट में सवाल उठाया गया कि एक नया Political विकल्प देने के वादे के साथ राजनीति में आई एनसीपी को अब जमात से अलग क्या बनाता है?

एनसीपी का कहना है कि जमात के साथ उसका रिश्ता वैचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक है, हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक छात्र आंदोलन से उभरने के दो साल से भी कम समय के भीतर पार्टी के सामने मतदाताओं को यह बताने की चुनौती है कि उसकी अलग Political पहचान क्या है.

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव के बाद यह चुनौती और बढ़ गई, क्योंकि एनसीपी और जमात की साझेदारी चुनाव के बाद भी जारी रही.

जमात प्रमुख शफीकुर रहमान विपक्ष के नेता बने, जबकि एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम ने विपक्ष के मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी संभाली. दोनों पार्टियां विपक्षी खेमे में साथ बनी रहीं और संसद के बाहर भी उनका सहयोग जारी रहा.

रिपोर्ट में कहा गया कि यह स्थिति एनसीपी की Political पहचान के लिए चुनौती पैदा करती है.

एनसीपी खुद को जमात से अलग Political दल बताती है और संस्थागत तौर पर यह सही भी है. हालांकि रिपोर्ट में कहा गया कि मतदाता किसी पार्टी की पहचान केवल उसके संविधान या आधिकारिक बयानों से तय नहीं करते. वे यह भी देखते हैं कि पार्टी किन दलों के साथ मंच साझा करती है. संसद में किसके साथ मिलकर काम करती है और सड़कों पर किनके साथ अभियान चलाती है.

ऐसे में जमात के साथ लगातार Political गतिविधियों में शामिल होने के कारण एनसीपी की अलग Political पहचान को लेकर सवाल और तेज हो रहे हैं.

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एएमटी/