जब ऋषिकेश दा ने राजेश खन्ना की जिद पर बदला फिल्म का क्लाइमेक्स, फिर भी अमिताभ ले गए बाजी

New Delhi, 29 सितंबर . हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनकी कहानी पर्दे पर खत्म होने के बाद भी दर्शकों के जेहन में लंबे समय तक चलती रहती है. ऋषिकेश मुखर्जी की 1973 में आई फिल्म ‘नमक हराम’ भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है. फिल्म में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की जोड़ी दूसरी और आखिरी बार बड़े पर्दे पर साथ नजर आई थी. इससे पहले दोनों को फिल्म ‘आनंद’ में खूब पसंद किया गया था. ‘नमक हराम’ की शूटिंग के दौरान दोनों सितारों के बीच स्टारडम की बदलती तस्वीर भी साफ दिखाई देने लगी थी.

उस दौर में राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के बड़े सुपरस्टार थे. दूसरी तरफ अमिताभ बच्चन अभी अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि, ‘नमक हराम’ ने आगे चलकर दोनों के करियर की दिशा को ही बदल दिया.

फिल्म की शूटिंग के दौरान ऋषिकेश मुखर्जी ने क्लाइमेक्स को बेहद गोपनीय रखा था. राजेश खन्ना बार-बार उनसे फिल्म के क्लाइमेक्स के बारे में पूछते लेकिन ऋषि दा आसानी से राज खोलने वाले नहीं थे लेकिन राजेश खन्ना भी कहां मानने वाले थे. आखिरकार उन्हें किसी तरह पता चल गया कि फिल्म के अंत में अमिताभ बच्चन के किरदार की मौत हो जाती है.

यह बात सामने आते ही राजेश खन्ना को चिंता होने लगी. उस समय फिल्मों में किसी किरदार की मौत का भावनात्मक असर बहुत बड़ा माना जाता था. दर्शकों की सहानुभूति अक्सर उस कलाकार के किरदार के साथ जुड़ जाती थी. ऐसे में राजेश खन्ना को लगा कि क्लाइमेक्स अमिताभ के किरदार के पक्ष में जा सकता है.

कहा जाता है कि इसके बाद राजेश खन्ना ने ऋषिकेश मुखर्जी से क्लाइमेक्स बदलने की बात कही. उस वक्त राजेश खन्ना का स्टारडम ऐसा था कि उनकी बात को नजरअंदाज करना आसान नहीं था. कहानी में बदलाव किया गया और फिल्म के अंत में अमिताभ के किरदार के बजाय राजेश खन्ना के किरदार की मौत दिखाई गई.

जब अमिताभ बच्चन को इस बदलाव की जानकारी हुई तो वह इससे खुश नहीं थे. इसके बाद फिल्म में कुछ और बदलाव किए गए और अमिताभ के किरदार को भी कहानी में बेहद अहम मोड़ दिया गया. खास बात यह थी कि इन बदलावों की पूरी जानकारी राजेश खन्ना को नहीं दी गई.

फिल्म जब पर्दे पर आई तो दर्शकों ने अमिताभ बच्चन के अभिनय को जमकर सराहा. राजेश खन्ना की मौत के बाद अमिताभ का किरदार कहानी में एक मजबूत भूमिका निभाता है और उनकी मौत का बदला लेता है. यही वजह रही कि फिल्म में राजेश खन्ना के होने के बावजूद चर्चा का बड़ा हिस्सा अमिताभ बच्चन के खाते में चला गया.

इस फिल्म के बाद दोनों के बीच रिश्तों को लेकर भी कई किस्से सामने आए. कहा जाता है कि राजेश खन्ना इस बात से नाराज थे कि फिल्म में उनके किरदार की मौजूदगी के बावजूद अमिताभ बच्चन दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींचने में कामयाब रहे. इसके बाद दोनों ने एक साथ काम नहीं किया.

30 सितंबर 1922 को कोलकाता में जन्मे ऋषिकेश मुखर्जी का अंदाज ही कुछ ऐसा था. वह सिर्फ सितारों को ध्यान में रखकर फिल्में नहीं बनाते थे बल्कि कहानी और किरदारों को सबसे ऊपर रखते थे. ‘आनंद’, ‘गुड्डी’, ‘अभिमान’, ‘चुपके-चुपके’ और ‘गोलमाल’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने मनोरंजन के साथ जिंदगी की सच्चाइयों को भी पर्दे पर उतारा.

ऋषिकेश मुखर्जी ने कई कलाकारों को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. अमिताभ बच्चन के करियर में भी उनका योगदान खास माना जाता है. 27 अगस्त 2006 को ऋषिकेश मुखर्जी इस दुनिया से चले गए,लेकिन उनकी फिल्में आज भी दर्शकों को हंसाती हैं, भावुक करती हैं और जिंदगी को देखने का एक नया नजरिया देती हैं.

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पीआईएम/पीएम