जब अमिताभ बच्चन के पास नहीं थी डिस्को की मेंबरशिप, विनोद खन्ना कराते थे एंट्री

Mumbai , 5 अक्टूबर . विनोद खन्ना और अमिताभ बच्चन को 70 के दशक में अक्सर एक-दूसरे का मुकाबला करने वाले सितारों के तौर पर देखा गया. दोनों की फिल्मों, स्टारडम और स्क्रीन प्रेजेंस की तुलना होती थी, लेकिन पर्दे के पीछे कहानी बिल्कुल अलग थी. दोनों के बीच ऐसी दोस्ती थी, जो फिल्मों की कामयाबी, स्टारडम और राइवलरी से कहीं आगे थी.

अमिताभ बच्चन ने खुद विनोद खन्ना को याद करते हुए दोस्ती से जुड़े कई किस्से साझा किए थे. इनमें एक किस्सा ऐसा भी था, जब अमिताभ के पास डिस्को क्लब की मेंबरशिप नहीं थी और विनोद उन्हें अपने साथ अंदर ले जाया करते थे.

दोनों की मुलाकात फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआती दिनों में हुई थी. 6 अक्टूबर 1946 को जन्मे विनोद खन्ना उस समय बड़े स्टार नहीं थे. वहीं अमिताभ भी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. दोनों ने ‘रेशमा और शेरा’ में साथ काम किया और यहीं से उनकी दोस्ती और गहरी होती चली गई.

अमिताभ ने विनोद खन्ना को याद करते हुए एक इंटरव्यू में बताया था कि शूटिंग के दिनों में दोनों साथ लंच करते थे. कई बार दोनों मेकअप रूम में बैठकर घंटों बातें करते रहते थे. शूटिंग खत्म होने के बाद भी उनकी मुलाकातें खत्म नहीं होती थीं. देर रात पैकअप के बाद दोनों कार से निकल पड़ते और आधी रात के बाद जुहू बीच तक ड्राइव पर जाते. वहां वक्त बिताते थे.

इन यादों में सबसे दिलचस्प किस्सा ताज होटल के डिस्को क्लब का है. अमिताभ ने अपने ब्लॉग में बताया था कि उस समय विनोद खन्ना उस क्लब के मेंबर थे, जबकि अमिताभ के पास उसकी मेंबरशिप नहीं थी. ऐसे में विनोद उन्हें अपने साथ अंदर ले जाते थे.

यह दोस्ती उस दौर में भी खास थी, जब दोनों को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी माना जाता था. 70 के दशक में अमिताभ बच्चन का स्टारडम तेजी से बढ़ रहा था, वहीं विनोद खन्ना भी अपनी अलग पहचान बना रहे थे. ‘हेरा फेरी’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘परवरिश’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी फिल्मों में दोनों साथ नजर आए और उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया.

पर्दे पर दोनों के किरदार कई बार दोस्त या भाई बने. ‘मुकद्दर का सिकंदर’ में दोनों की दोस्ती कहानी का अहम हिस्सा थी, जबकि ‘परवरिश’ में दोनों भाइयों के रोल में नजर आए. ‘अमर अकबर एंथनी’ में भी दोनों की जोड़ी ने खूब मनोरंजन किया.

अमिताभ और विनोद के बीच कथित राइवलरी को लेकर उस दौर में खूब लिखा गया, लेकिन विनोद खन्ना ने खुद 2006 में एक इंटरव्यू में कहा था कि यह राइवलरी मीडिया की बनाई हुई थी और हम दोनों दोस्त थे.

विनोद खन्ना का निधन 27 अप्रैल 2017 को हुआ.

–

पीके/एबीएम