जगन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए संशोधन की मांग की

अमरावती, 25 सितंबर . आंध्र प्रदेश के पूर्व Chief Minister और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने Friday को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए सीईसी और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 में संशोधन की मांग की.

उन्होंने पूर्व प्रणाली पर लौटने का आह्वान किया, जिसके तहत सीईसी और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति विपक्ष के नेता (एलओपी), India के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और Prime Minister की तीन सदस्यीय समिति द्वारा की जाती थी.

सीईसी ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में जगन ने एक पोस्ट में कहा कि लोकतंत्र तभी कायम रह सकता है जब जनता को चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थानों पर पूरा भरोसा हो.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने कई मौकों पर निर्णयों, मतदाता सूचियों और ‘ईसीआईनेट’ के प्रबंधन पर आपत्तियां उठाईं, जिससे जनता के बीच गंभीर सवाल और संदेह पैदा हो गए हैं. आरोप-प्रत्यारोप के बजाय, जनता को इस बात की स्पष्टता चाहिए कि किन आपत्तियों को दर्ज किया गया, उन पर क्या कार्रवाई की गई और मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने के मामले में प्रणाली ने कितनी पारदर्शिता से काम किया. इन मामलों में लोगों का विश्वास जीतने के लिए कदम उठाने की जरूरत है.

उन्होंने आगे कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास मजबूत किया जाना चाहिए, प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए, और ऐसी व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना चाहिए जिससे लोग बिना किसी भय के इस अधिकार का प्रयोग कर सकें.

वाईएसआरसीपी ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता न केवल कायम रहनी चाहिए बल्कि दिखनी भी चाहिए. जिस विधेयक (मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023) का हमने तब समर्थन किया था, उस पर वर्तमान संदर्भ में पुनर्विचार किया जाना चाहिए. केंद्र Government को आगे आकर मानक स्थापित करना चाहिए और इस भय को दूर करना चाहिए. विधेयक में एक संशोधन लाया जाना चाहिए जिसमें चुनाव आयुक्त की नियुक्ति एक बार फिर विपक्ष के नेता, मुख्य न्यायाधीश और Prime Minister की तीन सदस्यीय समिति द्वारा की जाए.

जगन ने टिप्पणी की कि एक छात्र द्वारा परीक्षक की नियुक्ति हमेशा आरोपों के घेरे में रहती है, भले ही परीक्षक पूरी तरह से ईमानदार हो, और बेहतर यही है कि इस प्रक्रिया को किसी निष्पक्ष व्यक्ति द्वारा संचालित किया जाए. इस कदम से निश्चित रूप से चुनाव आयोग का सम्मान और विश्वास पुनः प्राप्त होगा.

–

एमएस/