
New Delhi, 8 सितंबर . राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में छात्रावास की कमी को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली Government और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को इसे दूर करने के लिए समयबद्ध योजना तैयार करने का निर्देश दिया है. आयोग ने कहा कि छात्रावासों की कमी का सीधा असर उच्च शिक्षा की पहुंच और वहनीयता पर पड़ रहा है.
एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से दाखिल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद ये निर्देश जारी किए. यह मामला छात्रों के लिए अपर्याप्त छात्रावास सुविधाओं को लेकर दायर शिकायत से जुड़ा है.
शिकायत में खास तौर पर दिल्ली से बाहर के राज्यों से आने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों की परेशानियों को उठाया गया था. यह शिकायत नेटवर्क फॉर एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन ने दायर की थी. शिकायत में कहा गया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में करीब 72,000 स्नातक छात्रों को प्रवेश मिलता है, लेकिन उनके लिए उपलब्ध छात्रावास की सुविधा बेहद कम है.
शिकायत के मुताबिक, दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों को दिल्ली में सस्ता और उपयुक्त आवास पाने में काफी कठिनाई होती है. ऐसे में उन्हें महंगे पीजी आवास या निजी किराये के मकानों पर निर्भर रहना पड़ता है. इससे छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और उनकी पढ़ाई, मानसिक एवं शारीरिक कल्याण तथा जीवन की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है.
एनएचआरसी ने इस मामले का सितंबर 2025 में संज्ञान लिया था. आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव और शिक्षा मंत्रालय के सचिव को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराने तथा कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था. निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं मिलने पर आयोग ने अधिकारियों को याद दिलाया और चेतावनी दी थी कि जरूरत पड़ने पर वह मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत अपने बाध्यकारी अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है.
इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से संयुक्त कुलसचिव (कॉलेज) ने एक रिपोर्ट दाखिल की. रिपोर्ट में बताया गया कि विश्वविद्यालय के 65 घटक और संबद्ध कॉलेजों के माध्यम से स्नातक स्तर पर प्रवेश दिया जाता है. इनमें से 12 कॉलेज दिल्ली Government से पूरी तरह वित्त पोषित हैं, जबकि बाकी 53 कॉलेजों को यूजीसी पूरी तरह या काफी हद तक वित्तीय सहायता देता है.
विश्वविद्यालय ने कहा कि बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रावास सुविधाओं के विस्तार के लिए संबंधित वित्त पोषण एजेंसियों की ओर से धन उपलब्ध कराया जाना जरूरी है. विश्वविद्यालय ने यह भी माना कि दिल्ली से बाहर के छात्रों को आवास को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और विश्वविद्यालय तथा उसके कॉलेज संबंधित एजेंसियों के साथ इस मुद्दे को उठा रहे हैं.
एनएचआरसी ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में छात्रावासों की वास्तविक कमी से जुड़ी मूल समस्या का पर्याप्त समाधान नहीं किया गया है. आयोग के अनुसार, रिपोर्ट में मुख्य रूप से मौजूदा वित्तीय व्यवस्था का विवरण दिया गया और यह बताया गया कि विश्वविद्यालय संबंधित एजेंसियों के साथ इस मामले को उठा रहा है. लेकिन छात्रावासों की कमी दूर करने के लिए कोई ठोस, समन्वित और समयबद्ध योजना प्रस्तुत नहीं की गई.
एनएचआरसी ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में मौजूदा छात्रावास क्षमता और वास्तविक कमी का आंकड़ा नहीं दिया गया. इसके अलावा कितनी अतिरिक्त छात्रावास क्षमता की जरूरत है, मौजूदा छात्रावासों के विस्तार की क्या संभावनाएं हैं, नए छात्रावास बनाने की आवश्यकता कितनी है, इसके लिए कितना धन चाहिए, किस एजेंसी की वित्तीय जिम्मेदारी होगी और काम कब तक पूरा होगा. इन सवालों का भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया.
आयोग ने कहा कि ऐसा मुद्दा जिसका सीधा संबंध उच्च शिक्षा तक पहुंच और उसकी वहनीयता से है, खासकर दिल्ली से बाहर आने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के मामले में, केवल विश्वविद्यालय, कॉलेजों और वित्त पोषण एजेंसियों के बीच पत्राचार तक सीमित नहीं रह सकता.
मानवाधिकार आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 18(ई) के तहत दिल्ली Government के मुख्य सचिव और यूजीसी के अध्यक्ष को दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ मिलकर छात्रावास सुविधाओं के विस्तार पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है.
एनएचआरसी ने स्पष्ट किया कि योजना केवल नए छात्रावासों के निर्माण तक सीमित नहीं होनी चाहिए. अधिकारियों को मौजूदा छात्रावासों का भी आकलन करने और पुराने भवनों के उन्नयन, विस्तार, नवीनीकरण या अन्य तरीकों से क्षमता बढ़ाने की संभावनाओं की जांच करने को कहा गया है. प्रस्तावित योजना में मौजूदा छात्रावासों की क्षमता और बुनियादी ढांचे का पूरा आकलन, पुराने छात्रावासों के नवीनीकरण और उन्नयन की संभावनाएं तथा नए या अतिरिक्त छात्रावासों की जरूरत और व्यवहार्यता शामिल करनी होगी.
आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि रिपोर्ट में कॉलेजवार जरूरत, प्रस्तावित कदम, संस्थागत और वित्तीय जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा तथा काम पूरा करने की निश्चित समयसीमा बताई जाए. आयोग ने कहा कि केवल मौजूदा वित्त पोषण व्यवस्था को दोहराना पर्याप्त नहीं होगा. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि एनएचआरसी का पत्र प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर समेकित रिपोर्ट और प्रस्तावित योजना दाखिल की जाए. इसके साथ ही आयोग ने अतिरिक्त अथवा पूरी रिपोर्ट जमा करने के लिए 15 अक्टूबर की अलग समयसीमा भी निर्धारित की है.
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जीसीबी/
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