
चेन्नई, 11 अक्टूबर . Prime Minister Narendra Modi Sunday को चेन्नई में जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए. Prime Minister के दौरे को लेकर स्कूल के छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. पीएम मोदी के आगमन से पहले छात्रों ने से बात करते हुए अपने विचार व्यक्त किए.
Prime Minister मोदी चेन्नई ट्रेड सेंटर में आयोजित इस गोल्डन जुबली समारोह में पहुंचे. छात्रों ने हाथों में ‘हम यह कर दिखाएंगे, मोदी जी’ लिखे हुए प्लेकार्ड पकड़ रखे थे और देशभक्ति के नारों के साथ उनका स्वागत किया.
एक छात्र ने से बात करते हुए कहा, “मुझे इस स्कूल में पढ़ने पर बहुत गर्व महसूस होता है, क्योंकि हमें Prime Minister Narendra Modi से मिलने का मौका मिला है. मुझे विश्वास है कि हम देश को गर्व महसूस कराएंगे. हम विकसित India बनाने में अपना योगदान देंगे.”
दूसरे छात्र ने कहा, “मुझे गर्व है कि मैं जयगोपाल गारोडिया हिंदू विद्यालय में पढ़ता हूं. पढ़ाई के अलावा हमारा स्कूल खेल, कला और अन्य प्रतियोगिताओं में भी आगे रहता है. हम सभी को बहुत गर्व और खुशी है कि Prime Minister मोदी हमारे स्कूल आए.”
एक छात्रा ने कहा, “हमें बहुत खुशी है कि Prime Minister Narendra Modi हमारे 50वें गोल्डन जुबली समारोह में शामिल हुए. हमने Prime Minister के साथ इस गोल्डन जुबली को मनाने के लिए दो साल इंतजार किया है. मैं इस स्कूल में एलकेजी से पढ़ रही हूं. मुझे बहुत गर्व है कि मैं इस स्कूल का हिस्सा हूं.”
एक अन्य छात्र ने कहा, “आज मैं बहुत खुश हूं कि Prime Minister Narendra Modi हमसे मिलने आ रहे हैं. हम सभी बहुत भाग्यशाली हैं कि हमें यह मौका मिल रहा है.” छात्रों ने बताया कि उनके स्कूल में भारतीय सभ्यता और संस्कृति के बारे में विशेष रूप से सिखाया जाता है.”
एक छात्र ने कहा, “हमारे स्कूल में हमें भारतीय सभ्यता और संस्कृति के बारे में सिखाया जाता है. हम छात्र Prime Minister Narendra Modi का आशीर्वाद पाकर बहुत खुश हैं, इसलिए मैं Prime Minister Narendra Modi का दिल से आभार व्यक्त करता हूं.”
Prime Minister Narendra Modi ने अपने संबोधन में तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति अपने लगाव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, “देश के अलग-अलग हिस्सों की मेरी यात्राओं और वहां के लोगों से सीखने के अनुभवों ने India के बारे में मेरी समझ को आकार दिया है. 1990 के दशक की शुरुआत में मैं कन्याकुमारी से कश्मीर तक की ‘एकता यात्रा’ का भी हिस्सा था. गिरिजा अम्मा से मेरी पहली मुलाकात उसी एकता यात्रा के दौरान हुई थी. तब से हमारा संपर्क बना हुआ है. मेरी यात्राओं ने मुझे India की विविधता को करीब से समझने का मौका दिया. मेरे जीवन में तमिल भाषा और तमिल संस्कृति के प्रति प्रेम भी इन्हीं अनुभवों से पैदा हुआ.”
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एससीएच/
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