चेन्नई की सीबीआई अदालत का बड़ा फैसला, 2.68 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में कंपनी और छह लोग दोषी करार

चेन्नई, 1 सितंबर . चेन्नई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 2008 के बैंक धोखाधड़ी मामले में एक स्टील ट्रेडिंग फर्म और छह लोगों को दोषी ठहराया है.

Monday को अदालत ने एम/एस जेलानी स्टील ट्रेडर्स के साथ-साथ एस. अमुरुदीन, एल. विजयलक्ष्मी, एम. शांति, एस. कामाक्षी, एम. शिवकुमार और एम. रविचंद्रन बाबू को दोषी ठहराया.

अमुरुदीन को दो साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई, जबकि बाकी पांच लोगों में से हर एक को छह महीने की कठोर कैद की सजा दी गई.

अदालत ने दोषी ठहराए गए छह लोगों पर कुल 60,000 रुपए का जुर्माना लगाया, जबकि फर्म को अलग से 20,000 रुपए का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया.

यह मामला यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के बाद 21 अप्रैल, 2008 को सीबीआई ने दर्ज किया था. अभियोजन पक्ष के अनुसार, फर्म और अन्य आरोपियों ने आपराधिक साजिश रची थी और धोखाधड़ी से बैंक से कई तरह की क्रेडिट सुविधाएं हासिल की थीं.

आरोप है कि आरोपियों ने सुविधाएं पाने के लिए झूठे और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, फंड का गलत इस्तेमाल या हेराफेरी की, और बैंक को 2.68 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया.

अभियोजन पक्ष का कहना था कि क्रेडिट सुविधाओं से जुड़े वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की जांच के बाद यह पता चला कि आरोपियों ने मंजूर किए गए फंड को हासिल और गलत इस्तेमाल करने के लिए मिलकर काम किया था.

जांच ​​पूरी होने के बाद सीबीआई ने 23 जून 2009 को फर्म और 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. अदालत द्वारा सात आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाए जाने से पहले कई सालों तक मुकदमा चला.

अदालत ने यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच मैनेजर रहे एसआर. ज्ञानसेकर और एम. चक्रवर्ती को बरी कर दिया. बैंक के पैनल वकील पीबी संपत कुमार, जिन्हें भी आरोपी बनाया गया था, उन्हें भी बरी कर दिया गया है.

डीकेएम/एबीएम