चुनाव आयोग पर बवाल के बीच प्रतुल शाह देव की कांग्रेस को नसीहत- राजनीति करो, संवैधानिक संस्थाओं को टारगेट नहीं

रांची, 25 सितंबर . चुनाव आयोग के अंदर मतभेद और फैसलों में वोटिंग की खबरों को लेकर विपक्ष के हंगामे पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि राजनीति करनी है तो कीजिए, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने चुनाव आयोग के फैसलों पर उठ रहे सवालों को बेबुनियाद और नैरेटिव बनाने की कोशिश करार देते हुए कांग्रेस के कार्यकाल का इतिहास गिनाया, वहीं पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने Prime Minister मोदी से बिना किसी बाहरी दबाव के बोल्ड फैसले लेने की अपील की.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “राजनीति करनी है तो कीजिए, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं को टारगेट करना ठीक नहीं है. चुनाव को लेकर जो तमाशा मचा रखा है, क्या उसका कोई सबूत है? क्या कभी अखबार में खबर छापने से पहले चुनाव आयोग का कोट लिया गया?”

प्रतुल शाह देव ने कहा, “कहा जा रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों की आपस में बनती नहीं है, तो क्या उन्होंने कभी कोई असहमति नोट दिया और कहा कि मैं इस निर्णय से सहमत नहीं हूं? चुनाव आयोग के जितने भी आधिकारिक प्रेस रिलीज हैं, उन्हें देख लीजिए, सब एकमत हैं. हाल ही में हुई चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त एक साथ मौजूद थे. अगर सब कुछ ठीक नहीं होता तो यह स्थिति नहीं आती.”

उन्होंने आगे कहा कि दरअसल, कांग्रेस को अपने समय की याद आ रही है. टीएन शेषन ने बड़े ही मशहूर तरीके से इसका जिक्र किया था. उन्होंने बताया था कि जब वह कैबिनेट सचिव थे, तो राजीव गांधी को नियम-कानून से कोई मतलब नहीं था. वह सीधे तौर पर कहते थे कि मुख्य चुनाव आयुक्त को बता दो कि इन तारीखों पर चुनाव कराना है.

शाह देव ने कहा कि इसका वीडियो भी मौजूद है, जो उनके मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले का है, जब वह कैबिनेट सचिव के पद पर थे.

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जब कैबिनेट सचिव को Prime Minister यह निर्देश दे कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर को बता दीजिए कि इस तारीख को चुनाव है, तो उस समय चुनाव एक रबर स्टैंप था. नवीन चावला का उदाहरण कौन भूल सकता है. 2005 में उनकी नियुक्ति हुई थी. 2006 में उनके परिवार के एक ट्रस्ट को कांग्रेस के सांसदों, जिसमें गोयनका और अंबिका सोनी का नाम है, ने 85 लाख रुपए फाउंडेशन में दिए थे. क्या यह मतभेद नहीं था?

प्रतुल शाह देव ने कहा कि 2009 में जब नवीन चावला की मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर नियुक्ति हो रही थी, तो तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने President प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी कि वह कांग्रेस के लिए काम करते हैं, लेकिन फिर भी सोनिया गांधी की कृपा से नवीन चावला मुख्य चुनाव आयुक्त बन गए.

उन्होंने कहा कि एमएस गिल का उदाहरण देख लीजिए. कांग्रेस ने उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटने के बाद सांसद बनाया और फिर केंद्र में मंत्री भी बनाया. टीएन शेषन की बात करें तो उनकी शक्तियों को कम करने के लिए दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर दी गई थी. और सेवानिवृत्त होने के बाद कांग्रेस ने टीएन शेषन को ही Ahmedabad से लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ अपना चुनाव चिन्ह देकर मैदान में उतार दिया था.

भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से चुनाव आयोग के काम में दखल देती रही है. महाभियोग और तमाम तरह की बातें सिर्फ एक नैरेटिव बनाने की कोशिश हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. चुनाव आयोग में कहीं भी यह प्रूफ नहीं है कि किसी चुनाव आयुक्त ने खड़े होकर कहा हो कि ‘हमें वोटिंग करने दीजिए.’ वोटिंग का कोई सवाल ही नहीं उठा, सारे फैसले सर्वसम्मति से हुए.

उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट के आधार पर बवाल मचाया जा रहा है, जबकि उसी अखबार की एक और रिपोर्ट में कहा गया था कि 2012 में आर्मी आगरा से निकलकर दिल्ली पर कब्जा करने चली थी. तो ऐसी रिपोर्टों पर विश्वास करके जो बवाल मचाया जा रहा है, वह गलत है. हम तो कह रहे हैं कि एक चुनाव आयुक्त का कोट दिखा दीजिए, चुनाव आयोग का एक भी दस्तावेज दिखा दीजिए.

वहीं, पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने बीते 15 सालों में भाजपा के शासन को लेकर कहा, “मैं Prime Minister Narendra Modi और भाजपा की टीम से यही अपील कर रहा हूं कि आपके पीछे 140 करोड़ लोगों की शक्ति है. आपको किसी से डरने की जरूरत नहीं है. आपने बहुत गंभीर स्थिति में India को आगे बढ़ाया है. कोविड का समय था और आज दुनिया में जैसी स्थिति बनी हुई है, उसमें आप India को आगे लेकर जा रहे हैं और कई क्षेत्रों में विकास हो रहा है, लेकिन बाहर की टूलकिट से डरने की जरूरत नहीं है.”

एमएस