चुनाव आयोग पर बरसे मलिक मोआतसिम खान, एसआईआर को बताया ‘बोगस वर्क’

New Delhi, 3 अक्टूबर . चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान के बीच अब जमात-ए-इस्लामी हिंद ने भी मोर्चा खोल दिया है. संगठन के नेता मलिक मोआतसिम खान ने एसआईआर को देशभर के वोटरों को वोटिंग लिस्ट से बाहर करने की सोची-समझी साजिश करार दिया. उन्होंने दावा किया है कि 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं. उन्होंने चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और पूरी एसआईआर प्रक्रिया को रोककर नए सिरे से जांच की मांग की है.

जमात-ए-इस्लामी हिंद के नेता मलिक मोआतसिम खान ने कहा, “एसआईआर का जो मुद्दा है, उससे ये साफ जाहिर है कि ये देशभर में वोटरों को वोटिंग लिस्ट से निकालने की साजिश है. इसका मतलब ये है कि हमारा चुनाव आयोग देश के वोटरों को लिस्ट से बाहर कर रहा है. 13 करोड़ से ज्यादा लोगों को वोटिंग लिस्ट से निकाल दिया गया है.”

उन्होंने कहा कि दूसरे मुद्दे अलग हैं. कर्नाटक की बात आ रही है कि कहीं पर फॉर्म नंबर-7 के जरिए ऐसे आवेदन लिए गए हैं, जिसके जरिए जायज वोटरों को निकालने की कोशिश हो रही है. अन्य जगह ऐसा कहा जा रहा है कि जहां जायज वोटर नहीं हैं, उन्हें शामिल किया जा रहा है. खासतौर पर जो जेन-जी हैं, जिन्हें पहली बार वोट देना है, उनका फॉर्म-6 में उनके मां-बाप, दादा-दादी की जानकारी मांगी जा रही है.

मलिक खान ने कहा कि एसआईआर की पूरी कोशिश एक बोगस वर्क है. अफसोस है कि इसे Supreme Court ने भी समर्थन किया. वहीं, चुनाव आयोग के दफ्तर के अंदर एक अलग मसला है. दूसरे चुनाव आयुक्तों का भरोसा हासिल नहीं है. क्या चुनाव आयोग पूरे देश के अंदर संवैधानिक फ्रेमवर्क में काम कर रहा है या संविधान के खिलाफ है? ऐसे मौके पर ये सही है कि विपक्षी नेता विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

मलिक मोआतसिम खान ने कहा, “हालात को देखते हुए ईसीई को खुद अपनी खुशी से इस्तीफा दें या Government उन्हें पद से हटाए. जनता का भरोसा उनमें कम हो गया है. एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को रोक दिया जाए. इसकी जांच होनी चाहिए या फ्रेश वर्क हो. ये जो कुछ हुआ है, ऐसा लगता है कि इसमें वोटरों को लिस्ट से निकाला जा रहा है. ये कोई वेरिफिकेशन की प्रक्रिया नहीं है. हम देश की जनता के साथ हैं. अब इसके आधार पर कोई चुनाव न हो. या तो पुराने तरीके से हो या फिर कोई नया फ्रेमवर्क तैयार हो.”

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