
Lucknow, 27 अक्टूबर . अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने ईवीएम, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी), मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने मांग की कि ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं और एसआईआर के दौरान काटे गए जीवित मतदाताओं के नाम दोबारा बहाल किए जाएं.
मौर्य ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए Supreme Court से भी मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की. इसके अलावा, उन्होंने इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली, उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे और भाजपा-सपा के संबंधों पर भी अपनी राय रखी.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि चुनाव आयोग पर सवाल विपक्ष नहीं, बल्कि जनता उठा रही है. ईवीएम के दुरुपयोग को लेकर बार-बार चर्चा होती रही है और आयोग से निष्पक्षता और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है. दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए जाने के बाद उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए. ऐसा नहीं होने पर उन्होंने President द्रौपदी मुर्मु से कार्रवाई की मांग की.
मौर्य ने Supreme Court से इस गंभीर मामले में स्वतः संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की. उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है. इसके लिए ईवीएम से चुनाव बंद कराकर बैलेट पेपर से मतदान कराया जाना चाहिए. उन्होंने एसआईआर के नाम पर जीवित मतदाताओं के करोड़ों नाम काटे जाने का आरोप लगाते हुए उन्हें बहाल करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग भी की.
एसआईआर से संबंधित याचिका Supreme Court में खारिज होने के सवाल पर मौर्य ने कहा कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से India के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को बाहर किए जाने के बाद से चुनाव आयोग के दुरुपयोग की स्थिति बनी है. पहले नियुक्ति प्रक्रिया में Prime Minister, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे, तब आयोग पर इस तरह सवाल नहीं उठते थे. आयोग की कार्यप्रणाली पर सहमति जताकर Supreme Court Government के दबाव में दिखाई देता है. अदालत को उसी समय स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था, जब सीजेआई को नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर किया गया. इस मामले में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने से Government के सामने Supreme Court कमजोर साबित हुआ.
दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की रैली पर मौर्य ने कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना Government की जिम्मेदारी है. यदि Government लोकतंत्र को कुचलने पर तुली हो, तो बड़े से बड़ा प्रदर्शन भी प्रभावी नहीं हो सकता. उन्होंने केंद्र Government से अहंकार छोड़ने और इस्तीफा देने की मांग की. साथ ही, कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए आज भी लोग संघर्ष करने को तैयार हैं.
दिवाली से पहले बाजार बंद होने और व्यापारियों को नुकसान की आशंका पर मौर्य ने कहा कि प्रदर्शन केवल एक दिन का है, जबकि दिवाली तक पूरा एक सप्ताह मिलेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह व्यापारियों के कारोबार में किसी तरह का हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं हैं.
उत्तर प्रदेश चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर पूछे गए सवाल पर मौर्य ने कहा कि जिस दिन बातचीत होगी, उस दिन वह इसका खुलासा करेंगे. Samajwadi Party और भाजपा के बीच कथित सहयोग पर उन्होंने आरोप लगाया कि सपा भाजपा के एजेंडे पर काम करती दिखाई दे रही है और भाजपा की गतिविधियों का अनुसरण करती है.
बाबा बागेश्वर के रामचरितमानस को पूरी तरह लागू करने संबंधी बयान पर मौर्य ने तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि धर्म का चोला पहनकर धर्माचार्य बनने वाले पढ़े-लिखे लोगों की ऐसी भाषा उनकी मूर्खता को दर्शाती है.
वहीं, बाबा रामदेव के उस बयान पर कि ओवैसी के उत्तर प्रदेश चुनाव लड़ने से भाजपा को फायदा होगा, मौर्य ने कहा कि रामदेव ऐसा क्यों कह रहे हैं, यह वही बता सकते हैं. उन्होंने कहा कि India लोकतांत्रिक देश है और संविधान सभी को चुनाव लड़ने की अनुमति देता है.
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