
Mumbai , 7 नवंबर . चुनाव आयोग की ओर से दिल्ली समेत सात राज्यों में मतदाता सूची के ड्राफ्ट रोल से नाम हटाए गए लोगों को दोबारा आवेदन करने का अवसर दिए जाने के फैसले का शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने उन लोगों को एक और मौका दिया है, जो योग्य और वैध मतदाता हैं, लेकिन किसी कारणवश उनके नाम मतदाता सूची से हट गए हैं. निरुपम ने विपक्ष पर एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को बदनाम करने के लिए अनावश्यक विरोध और झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया.
संजय निरुपम ने कहा कि पूरे देश में विपक्ष ने एसआईआर के खिलाफ अलग-अलग तरह के प्रदर्शन, धरने और आंदोलन किए. एसआईआर कोई गैरकानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह संविधान के प्रावधानों के तहत संचालित होने वाली वैधानिक प्रक्रिया है. इस पूरी प्रक्रिया पर Supreme Court की निगरानी भी है. ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर लगातार आशंकाएं जताना और इसे गलत तरीके से पेश करना उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की ओर से यह चिंता जताई गई थी कि एसआईआर के कारण कुछ राज्यों में वैध मतदाताओं के नाम भी सूची से हट सकते हैं और उन्हें अपना पक्ष रखने या नाम दोबारा जुड़वाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाएगा. इन आशंकाओं को देखते हुए चुनाव आयोग ने अतिरिक्त मोहलत देने का फैसला किया है. आयोग ने नई तारीख घोषित की है, जिसके तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों वाले लोग फिर से आवेदन कर सकते हैं.
निरुपम ने कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति योग्य और वैध मतदाता है, तो वह दोबारा प्रयास करके अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करा सकता है. उन्होंने चुनाव आयोग के इस कदम को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इसका सम्मान किया जाना चाहिए. विपक्ष को एसआईआर के खिलाफ झूठा प्रचार करने के बजाय मतदाताओं के हित में किए गए इस प्रयास को समझना चाहिए.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी संजय निरुपम ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि दोनों गुटों के विलय को लेकर अक्सर चर्चाएं और अफवाहें सामने आती रहती हैं. अलग-अलग घटनाओं और मौकों को जोड़कर कई तरह के दावे किए जाते हैं. दोनों पक्षों की ओर से भी समय-समय पर अलग-अलग बयान दिए जाते हैं.
उन्होंने कहा कि एनसीपी के दोनों गुटों में से एक शिवसेना का सहयोगी दल है, जबकि दूसरे गुट के Political संबंध अलग हैं. दोनों पार्टियों को भविष्य में किस दिशा में आगे बढ़ना है, एक-दूसरे के साथ किस तरह के रिश्ते रखने हैं और विलय करना है या अलग-अलग रहना है, यह पूरी तरह उनका आंतरिक विषय है. अजित दादा के रहते क्या निर्णय हुआ था और उनके जाने के बाद विलय को लेकर क्या अड़चनें सामने आ रही हैं, इन सवालों पर भी शिवसेना को अपनी राय देने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती.
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के एक्स पोस्ट पर संजय निरुपम ने उन पर नकारात्मकता फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि देश में दिवाली का उत्सव शुरू हो चुका है और छठ महापर्व का आगमन हो रहा है. ऐसे शुभ अवसर पर सोनिया गांधी ने नकारात्मक विचार रखने का समय चुना है, जो अनुचित और निंदनीय है. पिछले 12 वर्षों में देश में लोकतंत्र की ताकत बढ़ी है और संविधान का शासन स्थापित हुआ है. जो लोग India में लोकतंत्र को खतरे में बताते हैं, वे राजधानी के रामलीला मैदान में हजारों-लाखों लोगों को जुटाकर रैलियां, आंदोलन और प्रदर्शन करते हैं. यदि देश में लोकतंत्र नहीं होता तो रामलीला मैदान में इस तरह के आयोजन संभव नहीं होते.
उन्होंने कहा कि संविधान ही नागरिकों को Government से असहमति जताने, उसकी नीतियों और कार्यक्रमों की आलोचना करने और अपनी बात रखने का अधिकार देता है. संविधान को किसी ने छेड़ा नहीं है और कोई भी उसे छेड़ नहीं सकता. उन्होंने सोनिया गांधी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि जब पूरा हिंदू समाज त्योहार मना रहा है, तब सकारात्मक संदेश देने के बजाय नकारात्मकता फैलाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस रवैये की निंदा करती है.
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