चुनाव आयोग की विश्वसनीयता दांव पर, ज्ञानेश कुमार को अब जाना चाहिए: प्रशांत किशोर  

दरभंगा, 8 अक्टूबर . बिहार के दरभंगा में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र कर कहा कि अब वक्त आ गया है कि उन्हें चले जाना चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता दांव पर है.

मीडिया से बातचीत के दौरान जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार के आने से पहले राजीव कुमार थे. उन्होंने भी ऐसे ही निर्वाचन आयोग को चलाया. जब वे रिटायर हुए तो उन्हें एचडीएफसी बैंक का चैयरमैन बना दिया गया. चुनाव आयोग की जो विश्वसनीयता है, वो दांव पर है और वो दांव पर किसी एक व्यक्ति या एक घटना की वजह से नहीं है. पिछले 7-8 साल से लगातार चाहे वोटर रोल बनाने का मामला हो, चुनाव की समय सारणी का मामला हो, आचार संहिता को लागू कराने का मामला हो, बिहार में 10-10 हजार रुपए देकर Government द्वारा वोट खरीदने का मामला हो या गिनती में धांधली का मामला हो, हर स्तर पर चुनाव आयोग खुलेआम Government और सत्तारूढ़ दल के पक्ष में दिख रहा है. इसलिए जनता को ऐसा लग रहा है कि चुनाव निष्पक्ष नहीं हो रहे हैं और आंदोलन हो रहा है. ज्ञानेश कुमार को जाना चाहिए, लेकिन उससे बढ़कर चुनाव आयोग में सुधार होना चाहिए. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में सुधार होना चाहि और वोटर लिस्ट को बनाने की प्रक्रिया में सुधार होना चाहिए ताकि जनता का इस पूरे चुनाव की प्रक्रिया पर विश्वास बढ़े.

दूसरी ओर शिक्षकों के लिए सातवें वेतन आयोग के मुद्दे पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने कहा कि शिक्षकों के लिए जो मुद्दा जरूरी है, उसे उठाया जाना चाहिए. मैंने इसे उठाया या किसी और ने यह बात मायने नहीं रखती. जरूरी यह है कि यह एक मुख्य मुद्दा बने, इस पर वोट मांगे जाएं और सबसे अहम बात यह है कि इसका कोई समाधान निकले. हमने बार-बार कहा है कि कोई भी व्यक्ति, विधायक या एमएलसी सातवें वेतन आयोग को लागू नहीं करवा सकता. अगर शिक्षक एकजुट हो जाएं, तो बिहार की सभी Political पार्टियों को इसका समाधान निकालने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. Lok Sabha चुनाव से पहले यह समाधान जरूरी है, क्योंकि जो भी दिल्ली पर राज करना चाहता है. उसे बिहार में Lok Sabha चुनाव जीतना होगा और छह लाख शिक्षकों के समर्थन के बिना वे बिहार नहीं जीत सकते. अब यह आप सभी शिक्षकों को तय करना है कि आप किस पर भरोसा करते हैं.

10 हजार नौकरी वाले बयान पर उन्होंने कहा कि जब मैं बांकीपुर विधानसभा का उपचुनाव लड़ रहा था तो मैंने कोई नौकरी देना का वादा नहीं किया था. जीतने के बाद मैंने कहा, चूंकि जनता ने भरोसा किया है. देशभर में मेरे जितने भी संपर्क हैं, उनसे बातचीत के बात एक राय बनी कि मैं सरकारी नौकरी तो नहीं दिला सकता, लेकिन प्राइवेट नौकरी तो दिला सकता हूं. उन्होंने दावा किया कि लोगों की ओर से उनके कार्यालय में सीवी जमा किए जा रहे हैं और नौकरी भी दिलाई जा रही है.

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डीकेएम/