
पेरिस, 3 सितंबर . प्रेस की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (आरएसएफ) ने तिब्बती क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन की ओर से मीडिया पर लगाए गई कथित सेंसरशिप की कड़ी आलोचना की है. उनके मुताबिक इससे तिब्बत में फ्लैश फ्लड की वजह से हुई तबाही का अंदाजा लगाना नामुमकिन है.
आरएसएफ ने अनुसार किसी भी स्वतंत्र तिब्बती मीडिया संस्थान या अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठन को बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर हालात की स्वतंत्र रिपोर्टिंग की अनुमति नहीं दी गई. संगठन के मुताबिक, “यह चीन में पत्रकारों पर लंबे समय से जारी कड़े नियंत्रण को दर्शाता है.”
आरोप है कि चीनी अधिकारियों ने केवल सरकारी मीडिया को बाढ़ की रिपोर्टिंग की इजाजत दी. इन रिपोर्ट्स में राहत एवं बचाव अभियानों में Government की उपलब्धियों को प्रमुखता दी जा रही है, जबकि आपदा से हुई वास्तविक तबाही और उसके व्यापक प्रभाव की स्वतंत्र तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है.
संगठन ने चीन के सरकारी अखबार शिनजिंग बाओ (द बीजिंग न्यूज) के हवाले से बताया कि अधिकारियों ने आपदा से संबंधित कथित ‘अफवाहें फैलाने’ के आरोप में 10 इंटरनेट यूजर्स के खिलाफ कार्रवाई भी की है.
आरएसएफ एशिया-प्रशांत की एडवोकेसी प्रमुख अलेक्जेंड्रा बिएलाकोव्स्का ने कहा कि President शी जिनपिंग के नेतृत्व में हाल के वर्षों में तिब्बत ‘‘वास्तविक अर्थों में सूचना का ब्लैक होल’’ बन गया है.
उन्होंने कहा, “स्वतंत्र तिब्बती मीडिया या अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को इस स्वायत्त क्षेत्र से स्वतंत्र रूप से खबरें करने की अनुमति नहीं है. वहां केवल सरकारी नियंत्रण वाले मीडिया और प्रचार तंत्र से जुड़े संस्थान ही काम कर सकते हैं, जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रचार विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार खबरें प्रकाशित करते हैं.”
स्वतंत्र मीडिया संस्थान तिब्बत रेडियो के प्रधान संपादक कालसांग जिग्मे ने भी आरएसएफ से कहा, “इस बार सूचना पर नियंत्रण पहले की प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में कहीं अधिक कड़ा नजर आ रहा है. पत्रकारों के लिए आपदा की वास्तविक गंभीरता का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है.”
जिग्मे ने कहा कि उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले तिब्बतियों के निर्वासित परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कई लोग सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा करने से हिचक रहे हैं. उन्हें डर है कि ऐसा करने से तिब्बत में रह रहे उनके परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंच सकता है.
आरएसएफ ने बताया, तिब्बत रेडियो द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, करीब 29 तिब्बतियों की मौत हो गई है, जबकि चीन की आधिकारिक संख्या 16 है. तिब्बती मीडिया संस्थानों का कहना है कि वास्तविक मृतक संख्या इससे काफी अधिक हो सकती है, लेकिन सीमित पहुंच और विश्वसनीय स्रोतों की कमी के कारण आंकड़ों की पुष्टि करना मुश्किल है.
आरएसएफ ने चीन के social media प्लेटफॉर्म्स पर भी व्यापक सेंसरशिप का आरोप लगाया है. विशेष रूप से वीचैट पर बाढ़ से संबंधित कई पोस्ट और संदर्भ कथित तौर पर हटा दिए गए या सेंसर कर दिए गए.
26 अगस्त को नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ का स्रोत चीन के तिब्बती क्षेत्र में था. बाढ़ का पानी सीमा पार बहने वाली भोटेकोशी नदी में पहुंचा और नेपाल में भारी तबाही मचाई. इस आपदा में एक हजार से अधिक लोगों की मौत हुई और हिमालयी देश के कई इलाकों में व्यापक नुकसान हुआ.
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केआर/
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