चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप धोखाधड़ी मामला : Supreme Court ने भूपेश अरोड़ा की जमानत रद्द की, रोहित विज की याचिका खारिज

New Delhi, 29 सितंबर . Supreme Court ने चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Tuesday को बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने आरोपी भूपेश अरोड़ा को मिली जमानत रद्द कर दी है और दूसरे आरोपी रोहित विज की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है.

यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज है. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की. सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि कोर्ट का मानना है कि अगर मूल अपराध में समझौता हो भी जाता है, तो भी उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधि खत्म नहीं होती है. इसी आधार पर Supreme Court ने ईडी की अर्जी को स्वीकार किया.

ईडी की ओर से एएसजी अनिल कौशिक और वकील अर्कज कुमार ने पैरवी की. वहीं, भूपेश अरोड़ा की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुक्ता गुप्ता और रोहित विज की तरफ से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल पेश हुए.

यह पूरा मामला ईडी की उस जांच से जुड़ा है जिसमें लोक्सम समेत कई फर्जी चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप्स के एक नेटवर्क की जांच की जा रही है. आरोप है कि ये ऐप्स ज्यादा रिटर्न का लालच देकर निवेशकों को फंसाते थे. ईडी के मुताबिक, इन ऐप्स से जो कमाई होती थी, उसे कई बैंक अकाउंट और कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था. फिर उसे कैश और विदेशी करेंसी में बदला जाता था और हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेज दिया जाता था.

जांच में आरोप है कि रोहित विज ने फंड को इधर-उधर करने में अहम भूमिका निभाई. रोहित विज रंजन मनीकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड और केडीएस फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों से जुड़ा था. इन कंपनियों के जरिए कमाई को बैंक ट्रांसफर से कैश और विदेशी करेंसी में बदला गया और फिर हवाला के जरिए बाहर भेजा गया.

जांच में चीनी और ताइवानी नागरिकों के साथ कथित संबंधों का भी जिक्र है. आरोप है कि ये नागरिक ऐसी कंपनियां और बैंक अकाउंट बनाने में शामिल थे, जिनका इस्तेमाल इन ऐप्स से कमाए गए पैसे को रूट करने के लिए किया जाता था.

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पीएम