
Mumbai , 29 अक्टूबर . ‘बड़ी मुश्किल है’, ‘तुम दिल की धड़कन में’, ‘मैं कोई ऐसा गीत गाऊं’ जैसे सुपरहिट गानों से Bollywood पर राज करने वाले गायक अभिजीत भट्टाचार्य उन कलाकारों में शुमार हैं, जिन्होंने कभी भी गायक बनने का सपना नहीं देखा था बल्कि वह चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना लेकर Mumbai आए थे.
30 अक्टूबर 1958 में Kanpur के एक बंगाली परिवार में जन्मे अभिजीत शुरुआत से ही पढ़ाई में दिलचस्पी रखते थे और सीए बनना चाहते थे, जिसके लिए वह क्राइस्ट चर्च कॉलेज से बी.कॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 1981 में चार्टर्ड अकाउंटेंसी का कोर्स करने Mumbai आए थे. हालांकि, उनके दिल में संगीत बसता था, इसलिए उन्होंने सीए की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर प्लेबैक सिंगिंग में हाथ आजमाने का फैसला किया.
दरअसल, Mumbai आने के बाद उनका पूरा ध्यान और दिल संगीत की तरफ खिंचता चला गया. उन्हें एहसास हुआ कि उनका असली सपना प्लेबैक सिंगिंग है, जिसके बाद उन्होंने सीए की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और अपना पूरा वक्त गायकी के संघर्ष में लगा दिया. हालांकि, Mumbai आने के बाद गायक को आर्थिक तंगी का सामना इस कदर करना पड़ा कि उन्हें छोटे गेस्ट हाउस और तंग कमरों में रहना पड़ा. Mumbai में अपना खर्च चलाने के लिए उन्होंने क्लर्क से लेकर कई छोटी-मोटी नौकरियां भी कीं. वे कई बार निराश होकर Kanpur लौट जाते थे लेकिन संगीत का आकर्षण उन्हें दोबारा Mumbai खींच लाता था.
इस दौरान, वे महान संगीतकारों जैसे आरडी बर्मन, बप्पी लहरी और राजेश रोशन से मिलने के लिए उनके घरों के बजाय सीधे रिकॉर्डिंग स्टूडियो के चक्कर काटा करते थे और बाहर घंटों इंतजार करते थे. इसी बीच, प्रसिद्ध संगीतकार रविंद्र जैन ने उन्हें अपने साथ रहने की जगह दी, जिससे Bollywood उद्योग से उनकी नजदीकी थोड़ी बढ़ी. इसके बाद उन्हें राजेश रोशन और जगजीत सिंह जैसे दिग्गजों के गानों में बतौर कोरस सिंगर (वह गायक जो मुख्य गायक के साथ समूह में या पीछे रहकर सहायक स्वर देता है) का काम मिलने लगा. दो साल के कड़े संघर्ष के बाद संगीत निर्देशक आर.डी. बर्मन ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें देव आनंद के बेटे सुनील आनंद की डेब्यू फिल्म ‘आनंद और आनंद’ (1984) में पहला बड़ा ब्रेक दिया.
इस फिल्म में अभिजीत को अपने आदर्श किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे महान गायकों के साथ गाने का मौका मिला. अभिजीत को लगा कि उनका करियर अब चल पड़ेगा लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई. फिल्म फ्लॉप होने के कारण उनके पास आ रहा काम अचानक बंद हो गया और उनका करियर शुरू होने से पहले ही दोबारा अधर में लटक गया.
6 से 7 साल के लंबे संघर्ष के बाद गायक ने गुलशन कुमार और टी-सीरीज के लिए किशोर कुमार के गानों के कवर वर्जन (श्रद्धांजलि एल्बम) रिकॉर्ड किए. दूरदर्शन के शोज में किशोर कुमार के गीतों को गाकर उन्होंने भारतीय घरों में अपनी थोड़ी पहचान बनाई.
साल 1990 में संगीतकार जोड़ी आनंद-मिलिंद ने उन्हें सलमान खान स्टारर फिल्म ‘बागी’ में गाने का मौका दिया. इस फिल्म का गाना ‘एक चंचल शोख हसीना’ और ‘चांदनी रात है’ ब्लॉकबस्टर साबित हुए. इन गानों की सफलता ने अभिजीत को रातोंरात स्टार बना दिया और उनके 9 साल के लंबे संघर्ष का अंत हुआ.
–
एनएस/पीएम
Skip to content