
New Delhi, 27 अक्टूबर . चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर Supreme Court में सुनवाई के दौरान केंद्र Government ने Tuesday को कहा कि इस मुद्दे को लेकर Government गंभीर है और इससे निपटने के लिए एक पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार किया जा रहा है. प्रस्तावित फ्रेमवर्क में बच्चों से संबंधित अश्लील कंटेंट के प्रसार को रोकने के साथ-साथ वयस्कों की बिना सहमति के अश्लील सामग्री साझा करने के मामलों को भी शामिल किया जा सकता है.
केंद्र Government की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की पीठ को बताया कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क केवल चाइल्ड पोर्नोग्राफी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिना सहमति के अश्लील कंटेंट साझा करने और इससे जुड़ी अन्य चुनौतियों से निपटने पर भी ध्यान देगा.
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार किए जा रहे अश्लील कंटेंट, मॉर्फ्ड तस्वीरों और ऐसी तस्वीरों के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई, जिनमें किसी व्यक्ति का चेहरा और शरीर वास्तविक व्यक्ति से मेल नहीं खाते. उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर इस तरह की सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है.
एसजी तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि प्रस्तावित विधेयक में इंटरनेट प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों (इंटरमीडियरीज) की जिम्मेदारियों को बढ़ाया जा सकता है. उनकी भूमिका केवल आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऐसे कंटेंट के अपलोड होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है.
केंद्र Government ने यह भी बताया कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का दायरा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है. इसके तहत केवल पीड़ित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि कोई तीसरा व्यक्ति भी सद्भावना के साथ शिकायत दर्ज करा सकेगा.
Government के अनुसार, इस पॉलिसी फ्रेमवर्क का उद्देश्य बिना सहमति के अश्लील सामग्री साझा करने, एआई से तैयार किए गए आपत्तिजनक कंटेंट और मॉर्फ्ड तस्वीरों के प्रसार से पैदा होने वाली चुनौतियों से निPatna है. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र Government ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों पर नीतिगत स्तर पर विचार किया जा रहा है.
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डीएससी
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