चांडी से विजयन तक: क्या जांचों के घेरे से बेदाग निकल पाएंगे केरल के पूर्व मुख्यमंत्री?

तिरुवनंतपुरम, 17 अक्टूबर . केरल के पूर्व Chief Minister पिनराई विजयन क्या कई जांचों और आरोपों के बीच अपनी Political छवि बरकरार रख पाएंगे? क्या वह भी कांग्रेस नेता और पूर्व Chief Minister ओमन चांडी की तरह Political नुकसान से उबरने में सफल होंगे? वर्ष 2016 में वामपंथी दलों की सत्ता में वापसी के बाद चांडी Government के खिलाफ जांच की गई थी, लेकिन उससे वाम मोर्चे को वैसी Political सफलता नहीं मिली, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. अब यही सवाल केरल की राजनीति में विजयन को लेकर उठ रहा है.

Chief Minister वी.डी. सतीशन ने पिछली Government के कामकाज और फैसलों को लेकर कई मोर्चों पर जांच शुरू करने की पहल की है. केरल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के साथ जांच की प्राथमिकताएं बदलना आम बात रही है. नई Governmentें पिछली Government के फैसलों की समीक्षा करती हैं, पुराने आरोपों को फिर से उठाती हैं और जवाबदेही तय करने का वादा करती हैं. हालांकि, इन जांचों से मिलने वाला Political लाभ हमेशा उम्मीद के मुताबिक नहीं होता.

मई 2016 में पिनराई विजयन के Chief Minister बनने के बाद उनकी Government ने उसी साल जनवरी से निवर्तमान ओमन चांडी Government के विवादित फैसलों की समीक्षा का आदेश दिया था. उस समय कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) के खिलाफ बड़े खुलासों की उम्मीद जताई गई थी. हालांकि, जांच से वाम मोर्चे को व्यापक Political लाभ नहीं मिला और कई आरोपों पर वह निर्णायक परिणाम सामने नहीं आए, जिनकी उसके नेताओं को अपेक्षा थी.

अब Chief Minister सतीशन के सामने भी ऐसी ही चुनौती है. उनकी Government ने मेसी कार्यक्रम विवाद, लोक सेवा आयोग (पीएससी) में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं और केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के कामकाज की जांच कराने की दिशा में कदम उठाए हैं. केआईआईएफबी की जांच की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है.

Government ने यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित ज्यादतियों के मामले में एक अतिरिक्त Police महानिदेशक (एडीजीपी) समेत कई Police अधिकारियों को निलंबित भी किया है. इससे संकेत मिलता है कि जवाबदेही का दायरा केवल वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों तक सीमित नहीं रहेगा. केआईआईएफबी की जांच Political रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. सतीशन ने आरोप लगाया है कि इस संस्थान ने Government और वित्त विभाग के सामान्य नियंत्रण से बाहर जाकर काम किया. अब Government के सामने यह साबित करने की चुनौती है कि कथित अनियमितताएं आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती हैं. यदि जांच में ठोस तथ्य सामने नहीं आते हैं, तो यह मुद्दा भी Political आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह सकता है.

दूसरी ओर, विजयन के लिए उनकी बेटी टी. वीणा से जुड़ा सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामला अधिक तात्कालिक चुनौती बनकर सामने आया है. यह मामला Enforcement Directorate (ईडी) से शुरू हुआ था, न कि सतीशन Government की पहल से. हाई कोर्ट के निर्देश के बाद सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने इस मामले में विजयन, उनकी बेटी वीणा और पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास को नामजद करते हुए मामले दर्ज किए. अब ईडी ने विजयन को Friday, 23 अक्टूबर को पूछताछ के लिए तलब किया है. हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है. ऐसे में किसी भी आरोप को साबित हुआ मानना उचित नहीं होगा.

इस पूरे घटनाक्रम में Political विडंबना भी नजर आती है. जिस Government ने कभी अपने पूर्ववर्ती शासन के खिलाफ आरोपों को उजागर करने का वादा किया था, अब उसे अपनी जांचों को लेकर Political प्रतिशोध के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, पूर्व Chief Minister विजयन भी अलग-अलग दिशाओं से हो रही जांच के दायरे में हैं.

सतीशन के सामने चुनौती जांच में विश्वसनीय और ठोस निष्कर्ष सामने लाने की है, जबकि विजयन के लिए चुनौती इन जांचों के बीच अपनी Political स्थिति बनाए रखने की है. केरल की बदलती सत्ता की राजनीति में जांच शुरू करना आसान है, लेकिन आरोपों को ठोस तथ्यों और कानूनी निष्कर्षों के आधार पर साबित करना असली परीक्षा है.

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डीएससी