चंद्रशिला पर्वत की गोद में बसा श्री तुंगनाथ मंदिर शिव मंदिर, जानिए इसका इतिहास

देहरादून, 5 अक्टूबर . देवभूमि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में चंद्रशिला पर्वत की गोद में स्थित श्री तुंगनाथ मंदिर विश्व का सबसे ऊंचाई पर बना शिव मंदिर में तृतीय केदार के रूप में भगवान शिव की पूजा की जाती है.

भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भगवान शिव की उत्सव डोली को पास के मक्कूमठ (मार्कंडेश्वर मंदिर) में स्थापित किया जाता है. Monday को उत्तराखंड के Chief Minister ने मंदिर को लेकर प्रतिक्रिया दी. साथ ही, सभी से श्री तुंगनाथ महादेव के दर्शन कि अपील की.

उन्होंने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का विडियो पोस्ट कर लिखा, “भगवान शिव को समर्पित और रुद्रप्रयाग जिले में मौजूद श्री तुंगनाथ मंदिर, पांच पवित्र केदारों में से एक है. ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच बसा, इस मंदिर की आध्यात्मिक आभा और प्राकृतिक सुंदरता मन को बहुत शांति देती है. यह जगह ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए भी एक खास आकर्षण है. रुद्रप्रयाग पहुंचने पर, श्री तुंगनाथ महादेव के दर्शन के लिए जरूर जाएं.”

मान्यता है कि कुरुक्षेत्र युद्ध के पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने यहां भगवान शिव की भुजाओं (बाहु) की पूजा अर्चना कर मंदिर की स्थापना की थी. बर्फ से ढकी गगनचुंबी चोटियों और अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर यह धाम युगों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है.

सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी होती है, जिससे तापमान शून्य से नीचे चला जाता है. बर्फ जमने के कारण मंदिर तक जाने वाले रास्ते और ट्रेकिंग मार्ग असुरक्षित व कठिन हो जाते हैं. परंपरा के अनुसार, सर्दियों के छह महीनों के लिए भगवान तुंगनाथ की प्रतीकात्मक (उत्सव) मूर्ति को नीचे मक्कूमठ स्थित श्री मार्कंडेय मंदिर में स्थापित किया जाता है, जहां पूरे शीतकाल में उनकी पूजा की जाती है.

उत्तराखंड के ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले चोपता से शुरू होने वाला तुंगनाथ का पैदल मार्ग मखमली बुग्यालों और देवदार के जंगलों से होकर गुजरता है. दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर होने के साथ-साथ यह स्थान ट्रेकर्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वप्निल गंतव्य है, जहां पहुंचकर बादलों के बीच महादेव की उपस्थिति का एहसास होता है.

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एनएस/पीएम