चंद्रयान से गगनयान तक : आईआईटी में इसरो अध्यक्ष ने सुनाई अंतरिक्ष के सफर की कहानी

New Delhi, 25 सितंबर . कभी India को अपने रॉकेट प्रक्षेपण के लिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से उपकरण जुटाने पड़ते थे. आज वही India दूसरे देशों के उपग्रहों को व्यावसायिक आधार पर अंतरिक्ष में भेज रहा है. इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने आईआईटी दिल्ली में India के अंतरिक्ष सफर की यह बातें बताई.

उन्होंने बताया कि कभी जिस क्रायोजेनिक तकनीक को साझा करने से इनकार कर दिया गया था, उसे India ने अपने दम पर विकसित कर लिया. अब देश की नजरें चांद पर मानव मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां हासिल करने पर हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने आईआईटी दिल्ली में India के अंतरिक्ष सफर और भविष्य की योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी. यहां व्याख्यान का विषय था, ‘India का अंतरिक्ष कार्यक्रम: चुनौतियां और आगे की राह’. इस दौरान उन्होंने India की शुरुआती चुनौतियों से लेकर चंद्रयान-3 की सफलता, अंतरिक्ष में उपग्रहों की डॉकिंग और मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारियों तक की कहानी साझा की.

डॉ. नारायणन ने India के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1962 से जोड़ते हुए बताया कि उस समय देश खाद्य सुरक्षा और साक्षरता जैसी बुनियादी चुनौतियों से जूझ रहा था. नवंबर 1963 में थुंबा से India का पहला रॉकेट प्रक्षेपित किया गया. उस समय रॉकेट को तैयार करने में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से जुटाए गए उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था. इसके बाद India ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में लगातार अपनी क्षमता बढ़ाई. आज देश अपने दम पर उपग्रह तैयार करने और उन्हें प्रक्षेपित करने के साथ-साथ दूसरे देशों के उपग्रहों को भी व्यावसायिक रूप से अंतरिक्ष में भेज रहा है. यह बदलाव India की तकनीकी आत्मनिर्भरता की लंबी यात्रा को दर्शाता है. दुनिया ने India को क्रायोजेनिक तकनीक नहीं दी, तो India ने खुद बना ली. India के अंतरिक्ष सफर में क्रायोजेनिक प्रणोदन तकनीक का विकास एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा है.

डॉ. नारायणन ने बताया कि 1990 के दशक की शुरुआत में कुछ देशों ने India को यह तकनीक देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद India ने इस चुनौती को अवसर में बदलने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि जब दुनिया ने हमें यह तकनीक देने से इनकार कर दिया, तो हमने इसे खुद विकसित करने का फैसला किया. आज मैं आपको बता सकता हूं कि हमने पूरी तरह अपने दम पर तीन क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणालियां विकसित की हैं. उन्होंने चंद्रयान-3 की सफलता को India के अंतरिक्ष कार्यक्रम का ऐतिहासिक अध्याय बताया. 23 अगस्त 2023 को India ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग की. इस उपलब्धि के साथ India चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बना और दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट उतरने वाला पहला देश बना.

उन्होंने आगे कहा, ”23 अगस्त 2023 India के लिए ऐतिहासिक दिन था. चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले पहले तीन देशों के बाद India चौथा देश बना और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बना.” चंद्रयान-3 की सफलता ने India की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमता को दुनिया के सामने मजबूती से रखा. डॉ. नारायणन ने India के हालिया अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि India अंतरिक्ष में दो यानों को सफलतापूर्वक जोड़ने की क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बना है.

उन्होंने उपग्रहों को सटीक कक्षा में स्थापित करने की India की बढ़ती क्षमता पर भी प्रकाश डाला. उनके अनुसार, अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के कई क्षेत्रों में India ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. इनमें चंद्रमा पर जल अणुओं की खोज और मंगल की कक्षा में पहली कोशिश में पहुंचने जैसी उपलब्धियां भी शामिल हैं. गगनयान से भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तक, अगले दशक की बड़ी योजनाएं डॉ. नारायणन ने India के अंतरिक्ष कार्यक्रम की आगामी योजनाओं का खाका भी सामने रखा.

उन्होंने बताया कि देश अब मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष में दीर्घकालिक मौजूदगी की दिशा में आगे बढ़ रहा है. India का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम फिलहाल अपनी पहली मानवरहित उड़ान की दिशा में काम कर रहा है. इस मिशन का उद्देश्य India की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को विकसित करना है. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को परियोजना की मंजूरी मिल चुकी है. इसे 2028 तक प्रक्षेपित करने की योजना है. इसके बाद वर्ष 2035 तक स्टेशन के अन्य मॉड्यूल भी जोड़े जाने का लक्ष्य है. चंद्रयान-4 पर उन्होंने बताया कि इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाना है. यह India के चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम को एक नए चरण में ले जाएगा.

डॉ. नारायणन ने चंद्रयान-5 और शुक्र ग्रह के लिए प्रस्तावित मिशन सहित भविष्य की योजनाओं का भी उल्लेख किया. India ने वर्ष 2040 तक चंद्रमा पर मानव को उतारने का लक्ष्य रखा है. यह लक्ष्य India के अंतरिक्ष कार्यक्रम की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है.

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जीसीबी/एसके