
पुणे, 1 सितंबर . पुणे की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने घूसखोरी मामले में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तत्कालीन प्रवर्तन अधिकारी देवीदास शिंडिकर को दोषी करार देते हुए चार साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी अधिकारी पर 1.50 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है. यह फैसला 31 अगस्त यानी Monday को सुनाया गया.
मामला वर्ष 2014 का है, जब नासिक स्थित एक स्कूल के पीएफ बकाया और उस पर लगने वाले जुर्माने की राशि को कम करने के एवज में रिश्वत मांगे जाने का आरोप सामने आया था.
मामले की शुरुआत एक स्कूल के महासचिव की शिकायत से हुई थी. शिकायतकर्ता ने सीबीआई को बताया था कि ईपीएफओ के तत्कालीन प्रवर्तन अधिकारी देवीदास शिंडिकर ने स्कूल द्वारा देय कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) बकाया तथा उससे संबंधित जुर्माने की राशि को कम करने के लिए रिश्वत की मांग की थी. आरोप के अनुसार, अधिकारी ने शुरुआत में शिकायतकर्ता से 8.50 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी. बाद में यह मांग बढ़ाकर 13 लाख रुपए कर दी गई. बातचीत के बाद आरोपी अधिकारी 10 लाख रुपए की रिश्वत लेने के लिए तैयार हुआ.
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी को रिश्वत लेते हुए पकड़ने के लिए जाल बिछाने की योजना तैयार की. सीबीआई ने 21 अप्रैल 2014 को कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को शिकायतकर्ता से 10 लाख रुपए की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. इस कार्रवाई के बाद रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच को आगे बढ़ाया गया और मामले से जुड़े साक्ष्यों को एकत्र किया गया.
सीबीआई ने शिकायत के आधार पर 17 अप्रैल 2014 को मामला दर्ज किया था. जांच के दौरान अधिकारियों ने रिश्वत की मांग, बातचीत और रकम स्वीकार किए जाने से संबंधित तथ्यों तथा अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की. जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 21 जुलाई 2014 को आरोपी देवीदास शिंडिकर के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद मामले की न्यायिक सुनवाई शुरू हुई, जिसमें अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों पर विचार किया गया.
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद पुणे की सीबीआई अदालत ने 31 अगस्त 2026 को आरोपी को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी ठहराया. अदालत ने दोषी अधिकारी को चार साल की कठोर कैद की सजा सुनाने के साथ-साथ 1.50 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया. इस फैसले के साथ वर्ष 2014 में दर्ज हुए इस रिश्वत मामले में करीब 12 साल बाद न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है.
–
एएसएच/डीकेपी
Skip to content