घुट-घुटकर मरने से सम्मान के साथ मरना बेहतर, विश्वेंद्र सिंह ने दिए कांग्रेस छोड़ने के संकेत

jaipur, 2 अक्टूबर . Rajasthan के पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने Rajasthan प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ बढ़ते विवाद के बीच कांग्रेस छोड़ने के संकेत दिए हैं.

भरतपुर-डीग क्षेत्र में कांग्रेस के हालिया प्रदर्शन को लेकर डोटासरा की खुलकर आलोचना करने और भर्ती परीक्षाओं एवं संगठन के कामकाज को लेकर आरोप लगाने के बाद विश्वेंद्र सिंह ने Friday को social media पोस्ट के जरिए अपना फैसला जाहिर किया.

डोटासरा को संबोधित करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने लिखा कि उनका सार्वजनिक जीवन ‘खुली किताब’ की तरह है और उन्होंने कभी अपने सम्मान पर दाग नहीं लगने दिया.

उन्होंने लिखा कि घुट-घुटकर मरने से सम्मान के साथ मरना बेहतर है. साथ ही कहा कि अपने पूर्वजों के सिद्धांतों पर चलते हुए उन्हें लगता है कि अब विदाई लेना ही उनके लिए बेहतर है. अब वह डोटासरा की नीतियों और काम करने के तरीकों के साथ खुद को नहीं जोड़ सकते.

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब डोटासरा के खिलाफ दिए गए बयानों को लेकर Rajasthan कांग्रेस की ओर से सिंह के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की खबरें सामने आई थीं.

हालांकि, पार्टी की ओर से कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होने से पहले ही सिंह ने पार्टी छोड़ने के अपने फैसले का संकेत दे दिया.

इस विवाद पर Thursday को प्रतिक्रिया देते हुए डोटासरा ने कहा था कि वह केवल social media पोस्ट के आधार पर कोई फैसला नहीं लेंगे. उन्होंने कहा कि विश्वेंद्र सिंह की भावनाओं और विचारों को भी जाना जाएगा और जिलाध्यक्षों से चर्चा की जाएगी.

उन्होंने कहा कि अगर मामला अनुशासनहीनता से जुड़ा हुआ है तो प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचने से पहले पार्टी की अनुशासन समिति इसकी जांच करेगी.

डोटासरा ने विश्वेंद्र सिंह के साथ अपने पुराने संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने सिंह को पार्टी का वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि वह उनके साथ राज्यमंत्री के रूप में काम कर चुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सिंह की ओर से उठाई जाने वाली किसी भी चिंता को सुना जाएगा.

डोटासरा के मुताबिक, विश्वेंद्र सिंह का उनके प्रति पहले काफी स्नेह रहा है, लेकिन पिछले करीब ढाई साल से संगठनात्मक मामलों को लेकर दोनों के बीच संवाद नहीं हुआ है.

इस बीच विश्वेंद्र सिंह ने एक अन्य social media पोस्ट में कहा कि उन्होंने हमेशा अपने आराध्य गिरिराज महाराज और अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर फैसले लिए हैं.

उन्होंने कहा कि उनके कार्यकर्ता उन बयानों से नाराज हैं, जो उनके मुताबिक कुछ छोटे नेताओं की ओर से दिए गए हैं. विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि अगर झूठ और गलत काम का साथ नहीं देना उनकी गलती है तो वह यह गलती आगे भी करते रहेंगे.

विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने हमेशा मान-सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जिया है और अपने सिद्धांतों तथा आदर्शों से कभी समझौता नहीं किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने न कभी गलत किया और न ही किसी गलत काम को सहन किया. उनका सार्वजनिक जीवन जनता की देन है.

विश्वेंद्र सिंह ने लिखा, ‘मैं उनके लिए जीता हूं और उनके लिए ही मरूंगा.’ उन्होंने यह भी कहा कि उनके खून की हर बूंद उनके कार्यकर्ताओं, मतदाताओं, विधानसभा क्षेत्र और Rajasthan की जनता के लिए समर्पित रही है और आगे भी रहेगी.

इसके बाद विश्वेंद्र सिंह ने अपनी तस्वीर के साथ हिंदी फिल्म के गाने ‘ठहरे हुए पानी में कंकड़ न मार…’ से जुड़ी एक और social media पोस्ट साझा की.

दरअसल, विश्वेंद्र सिंह और गोविंद सिंह डोटासरा के बीच विवाद उस समय और बढ़ गया, जब सिंह ने डोटासरा पर कई गंभीर आरोप लगाए.

30 सितंबर को विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहने के दौरान रीट परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे. उन्होंने डोटासरा के परिवार के सदस्यों को आरएएस इंटरव्यू में कथित तौर पर मिले अंकों को लेकर भी सवाल उठाए थे.

रिपोर्टों का हवाला देते हुए सिंह ने 2016 और 2018 की भर्ती परीक्षाओं का जिक्र किया और आरोप लगाया कि डोटासरा के कई रिश्तेदारों को इंटरव्यू में एक समान अंक मिले थे.

उन्होंने ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र और डोटासरा के परिवार के सदस्यों को मिले लाभ को लेकर भी सवाल उठाए थे. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

सिंह ने Rajasthan Government और Chief Minister भजनलाल शर्मा से मामले की जांच कराने और डोटासरा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी. भरतपुर और डीग के शहरी निकाय चुनावों में कांग्रेस को बहुमत नहीं मिलने के बाद सिंह ने पार्टी नेतृत्व की भी आलोचना की थी.

उन्होंने पार्टी के प्रदर्शन के लिए गोविंद सिंह डोटासरा, भरतपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दिनेश सुपा और डीग जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजीव चौधरी को जिम्मेदार ठहराया था.

विश्वेंद्र सिंह ने डोटासरा को भरतपुर आने की चुनौती भी दी थी और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के संगठन चलाने के तरीके की आलोचना की थी.

एक अक्टूबर को डोटासरा ने सिंह का नाम लिए बिना विवाद पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि कांग्रेस एकजुट है.

उन्होंने कांग्रेस को 125 साल पुरानी पार्टी बताते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें छह साल से ज्यादा समय से प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे रखी है.

डोटासरा ने कांग्रेस के खिलाफ हो रही आलोचना को भाजपा के कथित ‘टूलकिट’ से भी जोड़ा था.

विश्वेंद्र सिंह के बयानों पर कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी. महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सारिका सिंह चौधरी ने उन पर भाजपा के लिए ‘स्लीपर सेल’ की तरह काम करने का आरोप लगाया. वहीं, प्रदेश महासचिव देशराज मीणा ने भी आरोप लगाया कि सिंह भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं.

विश्वेंद्र सिंह के कांग्रेस छोड़ने के संकेत के बाद पूर्व मंत्री और Rajasthan कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के बीच चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है. सिंह ने फिलहाल अपने अगले Political कदम की घोषणा नहीं की है.

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एएमटी/