गौतमबुद्ध नगर में ‘ऑपरेशन फास्ट’ 1 नवंबर से, अब जाम में नहीं फंसेगी एंबुलेंस, 24 घंटे मिलेगी ट्रैफिक क्लीयरेंस की सुविधा

नोएडा, 30 अक्टूबर . गंभीर मरीजों और सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए गौतमबुद्ध नगर Police कमिश्नरेट ने एक बड़ी पहल की है. Police कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में जिले में ‘ऑपरेशन फास्ट’ (फास्ट–फास्ट एम्बुलेंस सीमलेस ट्रांजिशन) शुरू किया जा रहा है. इसके तहत आपातकालीन एंबुलेंस को ट्रैफिक में प्राथमिकता देते हुए निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा. यह पहल लागू करने वाला गौतमबुद्ध नगर उत्तर प्रदेश का पहला जनपद बन गया है. नई व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से लागू होगी.

इस योजना का मुख्य उद्देश्य गंभीर रूप से बीमार मरीजों, ट्रॉमा मरीजों और सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को कम से कम समय में अस्पताल पहुंचाना है, ताकि ट्रैफिक जाम के कारण किसी मरीज को जीवनरक्षक उपचार मिलने में देरी न हो और रोकी जा सकने वाली मौतों की संख्या कम की जा सके. Police उपायुक्त मुख्यालय शैव्या गोयल ने रिसर्च के बाद इस योजना का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत ट्रैफिक Police कंट्रोल रूम में 24 घंटे संचालित होने वाला एक समर्पित एंबुलेंस ट्रैफिक सेल स्थापित किया जा रहा है. इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 9218981716 जारी किया गया है.

इस व्यवस्था से जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों, एंबुलेंस सेवा प्रदाताओं तथा आपातकालीन डिस्पैच केंद्रों को जोड़ा गया है. जिले के 72 अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ भी Police ने बैठक कर योजना की जानकारी दी है. 108 एंबुलेंस सेवा को भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है. नई व्यवस्था के तहत जब किसी मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस को ट्रैफिक सहायता की जरूरत होगी, तो एंबुलेंस डिस्पैचर, अस्पताल का कंट्रोल रूम या एंबुलेंस कर्मचारी उसकी लोकेशन, अस्पताल का गंतव्य और प्रस्तावित रूट की जानकारी समर्पित एंबुलेंस ट्रैफिक सेल को देगा.

सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम संबंधित मार्ग पर तैनात ट्रैफिक Policeकर्मियों को अलर्ट करेगा. इसके बाद एंबुलेंस के पहुंचने से पहले प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक क्लीयरेंस कराया जाएगा. जरूरत के अनुसार कुछ समय के लिए ट्रैफिक सिग्नल का संचालन बदला जा सकेगा, विपरीत दिशा के यातायात को नियंत्रित किया जाएगा और वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था की जाएगी. यह पूरी व्यवस्था रोलिंग ट्रैफिक क्लीयरेंस मैकेनिज्म पर आधारित होगी. यानी एंबुलेंस जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, उसके अगले चौराहों पर भी पहले से ट्रैफिक नियंत्रित किया जाता रहेगा. इससे एंबुलेंस को लगातार रास्ता मिलता रहेगा और आम लोगों को भी कम से कम असुविधा होगी.

इसके अलावा शहर में लगे पब्लिक एड्रेस सिस्टम और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम की मदद से भी ट्रैफिक प्रबंधन किया जाएगा. पीए सिस्टम के माध्यम से वाहन चालकों को एंबुलेंस के आने की सूचना देकर रास्ता देने की अपील की जाएगी. इस व्यवस्था की व्यवहारिकता जांचने के लिए गौतमबुद्ध नगर Police ने पहले ट्रायल रन भी किया था. व्यस्त ट्रैफिक के दौरान एक खाली एंबुलेंस ने चिल्ला बॉर्डर से मैक्स हॉस्पिटल और फोर्टिस हॉस्पिटल तक लगभग 12 किलोमीटर की दूरी प्रत्येक मार्ग पर करीब 10 मिनट में तय की. Police के मुताबिक, यह ट्रायल सामान्य यातायात को बाधित किए बिना प्रभावी ट्रैफिक समन्वय के जरिए सफलतापूर्वक पूरा किया गया.

इससे साबित हुआ कि बेहतर तालमेल और समय पर ट्रैफिक नियंत्रण के जरिए भीड़भाड़ के दौरान भी एंबुलेंस के सफर का समय काफी कम किया जा सकता है. ऑपरेशन फास्ट के तहत सड़क दुर्घटना में घायल लोगों और गंभीर ट्रॉमा मरीजों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी. सिर में गंभीर चोट, अत्यधिक रक्तस्राव, कई फ्रैक्चर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी आपातकालीन स्थितियों में हर मिनट मरीज के लिए महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में दुर्घटनास्थल से अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर तक एंबुलेंस को तेजी से पहुंचाने से उपचार में होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी. यह पहल जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट की अवधारणा के अनुरूप है.

इसका उद्देश्य समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों सहित अन्य रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करना है. Police ने आम नागरिकों से अपील की है कि सड़क पर एंबुलेंस दिखाई देने पर उसे तुरंत रास्ता दें. चौराहों और सड़कों को अवरुद्ध न करें तथा ट्रैफिक Police के निर्देशों का पालन करें.

Police का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ एंबुलेंस को रास्ता देना नहीं, बल्कि तकनीक और बेहतर समन्वय के जरिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है. गौतमबुद्ध नगर Police कमिश्नरेट की इस पहल से उम्मीद है कि गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचने में लगने वाला समय कम होगा और ट्रैफिक जाम के कारण होने वाली देरी से बचाया जा सकेगा.

–

पीकेटी/डीकेपी