
पणजी, 25 सितंबर . गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) संजय गोयल ने Friday को उन खबरों का खंडन किया, जिनमें राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) में ‘खामियों’ की बात कही गई थी. उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रक्रिया ‘पूरी तरह पारदर्शी’ थी और जिन मतदाताओं का नाम सूची से छूट गया था, उनमें से अधिकांश ने फॉर्म 6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में वापस दर्ज करा लिया.
उनका ये बयान उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें दावा किया गया था कि गोवा के सीईओ ने ‘ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर’ द्वारा ‘हटाए गए’ 97 मतदाताओं को शामिल करने के लिए सात दिनों में आठ बार ईसीआई को पत्र लिखा था.
मीडिया से बात करते हुए संजय गोयल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधियों ने एक ज्ञापन सौंपा है. हमने उन्हें स्पष्ट कर दिया है कि पूरी एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न की गई है.
उन्होंने कहा कि हर राज्य में सीओ और डीओ स्तर पर Political दलों के साथ बैठकें आयोजित की गईं. सभी तार्किक विसंगति सूचियों को मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित किया गया. अंतिम मतदाता सूची भी पार्टियों के साथ साझा की गई. उन्होंने आगे बताया कि राज्य में एसआईआर प्रक्रिया पूरी हुए सात महीने हो चुके हैं.
सीईओ ने आगे कहा कि हमें जो कुछ अपीलें मिली थीं, उनका भी निपटारा कर दिया गया है. इसके अलावा, हमें किसी भी Political दल से कोई शिकायत नहीं मिली. यहां तक कि जब Political दलों के प्रतिनिधि (एसआईआर प्रक्रिया के दौरान) मौजूद थे, तब भी उन्होंने कोई आपत्ति नहीं उठाई.
प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शी बताते हुए उन्होंने कहा, “जहां भी आवश्यकता पड़ी, हमने चुनाव आयोग को सहायता के लिए लिखा… यह प्रक्रिया उनके सहयोग और टीम वर्क से पूरी हुई है.”
97 ‘हटाए गए’ मतदाताओं के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने जवाब दिया, “बूथ स्तरीय अधिकारियों ने बाद में उन लोगों के लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जो (अंतिम मतदाता सूची से) छूट गए थे और उनसे फॉर्म 6 भरवाया. जो लोग उपलब्ध थे और इच्छुक थे, उनसे मार्च-अप्रैल में भी फॉर्म 6 भरवाया गया था.
गोवा के सीईओ ने आगे कहा कि यदि अभी भी बचे हुए लोग उपलब्ध हैं और इच्छुक हैं, तो वे फॉर्म 6 भर सकते हैं, जिसके बाद उनके नाम भी शामिल कर लिए जाएंगे. वे अपने मतदान अधिकार का उपयोग कर सकेंगे.
इसके अलावा, उन्होंने राज्य की एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि से इनकार करते हुए कहा कि फॉर्म 6 भरने की यह प्रक्रिया हमेशा से मौजूद थी (जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे). इसलिए, यह कोई बड़ी गलती या चूक नहीं है, न ही किसी का मतदान अधिकार स्थायी रूप से छीना गया है.
संजय गोयल ने कहा कि फॉर्म 6 भरने वाले अधिकांश मतदाताओं के नाम समय पर मतदाता सूची में फिर से जोड़ दिए गए थे ताकि वे अपना वोट डाल सकें.
एक सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग को आठ ईमेल लिखे जाने के दावों के संबंध में, उन्होंने इसे ‘संचार की प्रक्रिया’ बताया.
गोएल ने कहा कि हमने स्पष्टीकरण मांगे हैं और उन्होंने (चुनाव आयोग) निर्देश भेजे हैं. हम इस प्रक्रिया में उनकी (चुनाव आयोग की) सहायता भी चाहते हैं. ये सब होता रहता है.
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एमएस/
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