
पणजी, 29 अगस्त . गोवा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामले में ईडी ने तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट भी शामिल है. इन सभी को पूछताछ के लिए 1 सितंबर तक हिरासत में लिया गया है.
यह मामला गोवा के एक निवासी के ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़ा है, जिसे एक संदिग्ध खाते में 2.60 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया था.
ईडी ने 27 अगस्त को ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड मामले में भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया.
गोवा की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने उन्हें 1 सितंबर तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया है. साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या पांच हो गई है.
ईडी ने एक बयान में कहा कि फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को 23 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था.
ईडी ने नॉर्थ गोवा के साइबर क्राइम Police स्टेशन में 9 जून, 2025 को दर्ज First Information Report के आधार पर जांच शुरू की थी. इस मामले में पीड़ित को वीडियो कॉल पर रखा गया, उसे यकीन दिलाया गया कि वह आपराधिक जांच के दायरे में है और ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स’ बताकर 2.60 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया.
बयान में कहा गया है कि ईडी की जांच से पता चला कि यह पैसा एक संगठित सिस्टम में गया, जो साइबर फ्रॉड से मिली रकम को बैंकिंग क्रेडिट के तौर पर लेने, उसे कैश में बदलने और फिर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से ‘फुल फ्लेज्ड मनी चेंजर’ लाइसेंस रखने वाली कंपनियों के जरिए विदेशी मुद्रा में बदलने का काम करता था.
ईडी ने कहा कि राशि को 400 से ज्यादा बेनिफिशियरी अकाउंट्स में बांटा गया और उन कंपनियों में भेजा गया, जिनके डायरेक्टर कागजों पर तो ऐसे लोग थे, जिनके पास कोई खास साधन नहीं थे, लेकिन खाते असल में दूसरे लोग चला रहे थे. इस तरह अपराध से मिली रकम को व्हाइट मनी के रूप में दिखाया गया.
ईडी ने बताया कि इन संस्थाओं के खातों से 20 से ज्यादा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 330 पीड़ितों की शिकायतें और 163 First Information Report जुड़ी हैं. इनमें 417.49 करोड़ रुपए के नुकसान की बात सामने आई है और इन खातों से 27,850 करोड़ रुपए से ज्यादा का बैंकिंग ट्रांजैक्शन हुआ है.
इसमें कहा गया है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट भूषण सूर्यकांत मोये ने उन्हें दिए गए पहचान दस्तावेजों के आधार पर नेटवर्क की 21 कंपनियां बनाईं. उन्होंने उन कंपनियों और उनके 43 डमी डायरेक्टरों को एक ग्रुप की तरह संभाला और अलग-अलग असाइनमेंट के बजाय एक ही बार में उनका इनकम-टैक्स रिटर्न फाइल किया.
बयान में कहा गया है कि विलास नारायण पवार ने आरटीजीएस एंट्रीज का इंतजाम किया, जिनसे गलत तरीके से हासिल किया गया पैसा नेटवर्क के अकाउंट्स तक पहुंचा, और शैलेश दगडू चव्हाण ने उन ट्रांसफर्स के बदले कैश उपलब्ध कराया.
ईडी ने बताया कि 21 अगस्त को इन तीनों के ठिकानों की तलाशी ली गई थी. 17 जुलाई को हुई तलाशी के बाद भी मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियां 23 अगस्त को हुई गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले तक जारी रहीं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार करना और कस्टडी में पूछताछ करना जरूरी हो गया था.
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डीकेएम/एबीएम
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