गुजरात : 538 जेल सिपाहियों के 20वें बैच ने नौ महीने का प्रशिक्षण किया पूरा, 60 महिलाएं भी शामिल

Ahmedabad, 4 नवंबर . Gujarat जेल और सुधार प्रशासन विभाग के प्रशिक्षण संस्थान, जीआईपीसीए में कुल 538 नए भर्ती किए गए जेल सिपाहियों (60 महिलाएं) ने नौ महीने का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है. इस प्रशिक्षण में विभाग ने आधुनिक जेल सुरक्षा, नए आपराधिक कानूनों और कैदियों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया है.

जेल सिपाहियों के 20वें बैच ने एक ग्रेजुएशन परेड और समारोह में शपथ ली. इस कार्यक्रम में जेल और सुधार प्रशासन के Police महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. के.एल.एन. राव शामिल हुए, जिन्होंने प्रशिक्षुओं और उनके परिवारों को संबोधित किया.

478 पुरुष और 60 महिला प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए राव ने कहा, “ग्रेजुएशन समारोह वर्दीधारी कर्मियों के प्रशिक्षण के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक होता है.”

उन्होंने प्रशिक्षुओं के परिवारों, प्रशिक्षकों और संस्थान के प्रधानाचार्य के योगदान की भी सराहना की. आपराधिक न्याय प्रणाली में जेल विभाग की भूमिका के बारे में बताते हुए, राव ने कहा कि यह प्रणाली के तीन स्तंभों में से एक है. अन्य दो स्तंभों में Police (जो कानून लागू करने के लिए जिम्मेदार है) और न्यायपालिका (जो न्यायिक कार्यवाही करती है) शामिल हैं.

अदालत के फैसलों के बाद कैदियों को हिरासत में रखने और उनके पुनर्वास की जिम्मेदारी जेल विभाग की होती है.राव ने कहा, “जेल कर्मचारियों पर कैदियों को पश्चाताप के जरिए सुधारने और उन्हें एक अच्छे नागरिक के रूप में समाज में वापस लाने की पवित्र जिम्मेदारी है.” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जेल सेवा के लिए साहस, त्याग और समर्पण की आवश्यकता होती है.

नौ महीने के प्रशिक्षण के दौरान, रंगरूटों को जेल मैनुअल, प्रिजन्स एक्ट (जेल अधिनियम), प्रिज़्नर्स एक्ट (कैदी अधिनियम) के प्रावधानों के साथ-साथ पैरोल और फरलो से जुड़े नियमों के बारे में पढ़ाया गया.

पाठ्यक्रम में भारतीय संविधान, मानवाधिकार, सूचना का अधिकार अधिनियम, भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता के साथ-साथ तीन नए आपराधिक कानून — भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) भी शामिल थे.

प्रशिक्षुओं को मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और अपराध विज्ञान (क्रिमिनोलॉजी) का प्रशिक्षण दिया गया. इसके अलावा, उन्हें आधुनिक सुरक्षा उपकरणों, जैसे एनयूडी, बॉडी-वर्न कैमरे, हैंड-हेल्ड और डोर-फ्रेम मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, बॉडी स्कैनर और ब्रेथलाइजर को चलाने का प्रशिक्षण भी दिया गया.

प्रशिक्षण में कंप्यूटर कौशल, ई-प्रिजन्स एप्लिकेशन, प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड), योग, कराटे और खेलों के साथ-साथ कई आउटडोर गतिविधियां भी शामिल थीं.

राव ने कहा कि आर्थिक वैश्वीकरण और तकनीकी प्रगति ने अपराध के स्वरूप को बदल दिया है. अब जेलों में ऐसे अपराधी भी आ रहे हैं जो नए तरह के अपराधों, जिनमें ‘व्हाइट-कॉलर’ अपराध में लिप्त हैं. उन्होंने कहा, “इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए काम करने के तौर-तरीकों को अपडेट करने और उभरते हुए आपराधिक रुझानों की गहरी समझ रखने की आवश्यकता है.”

उन्होंने नवनियुक्त कर्मियों से आग्रह किया कि वे जेलों में अनुशासन, शांति और सुरक्षा बनाए रखने तथा कानून के शासन को कायम रखने के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के प्रति भी सतर्क रहें.

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एससीएच/पीएम