
गांधीनगर, 17 अक्टूबर . Gujarat में 2017 से इस वर्ष सितंबर तक ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ के माध्यम से 53,000 से अधिक महिलाओं को सहायता मिली है. हिंसा से प्रभावित महिलाओं को दी गई सहायता में आश्रय का हिस्सा सबसे अधिक है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 34 जिलों में संचालित 36 केंद्रों के माध्यम से कुल 53,851 महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है.
अधिकारियों ने बताया, “ये केंद्र हिंसा का सामना कर रही महिलाओं और किशोरियों को आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में मदद करने के लिए एक ही छत के नीचे आश्रय, चिकित्सा उपचार, कानूनी सहायता, Police सहायता और परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, ताकि उन्हें कई कार्यालयों में जाने की आवश्यकता न पड़े.”
आंकड़ों के अनुसार, सहायता प्राप्त महिलाओं में से 29,351 को आश्रय मिला, जबकि 8,527 को चिकित्सा सहायता, 7,617 को कानूनी सहायता और 4,706 को Police सहायता प्रदान की गई.
इन केंद्रों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा, आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव सेवाएं भी उपलब्ध हैं. ये केंद्र घर, कार्यस्थल, समुदाय या सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं और किशोरियों की सहायता करते हैं.
सखी वन स्टॉप सेंटर योजना अगस्त 2016 में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही स्थान पर एकीकृत सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी.
इन केंद्रों का उद्देश्य व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तत्काल सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं, जिनमें चिकित्सा देखभाल, कानूनी परामर्श और Police हस्तक्षेप शामिल हैं, तक पहुंच को सुगम बनाना है.
Gujarat में यह पहल राज्य Government के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही है. ये केंद्र चौबीसों घंटे कार्यरत रहते हैं, जिससे संकटग्रस्त महिलाएं किसी भी समय सहायता प्राप्त कर सकती हैं.
इनकी सेवाएं अस्थायी आश्रय और चिकित्सा सहायता सहित तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई गई हैं और साथ ही कानूनी और Police सहायता तक पहुंच को सुगम बनाती हैं.
नवीनतम आंकड़े 2017 से प्रदान की गई सहायता को कवर करते हैं.
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एएसएच/एबीएम
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