गुजरात में यूसीसी को राष्ट्रपति की मंजूरी, विवाह से लेकर उत्तराधिकार तक बदलेंगे नियम

गांधीनगर, 2 अक्टूबर . Gujarat में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो गया है. Gujarat यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026 को President द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी मिल गई है. इसके बाद राज्य Government ने राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है और राज्य में कानून को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है.

Gujarat विधानसभा ने मार्च 2026 में Gujarat यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित किया था. यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों के लिए धर्म की परवाह किए बिना एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान करता है. विधेयक के अनुसार कानून को प्रभावी करने की तारीख राज्य Government राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय करेगी.

यूसीसी के लागू होने के बाद विवाह और उससे जुड़े कानूनी मामलों में कई महत्वपूर्ण बदलाव होंगे. इसमें विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने का प्रावधान है. इसी तरह लिव-इन रिलेशनशिप को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा. कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करना है.

यूसीसी में उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों को लेकर बेटियों और बेटों के बीच समानता का प्रावधान किया गया है. यानी पैतृक और अन्य उत्तराधिकार संबंधी मामलों में बेटी को भी बेटे के समान अधिकार मिलेगा. बिना वसीयत के किसी व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में उसके जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के अधिकार भी कानून के तहत निर्धारित किए गए हैं.

इसके अलावा सरोगेसी और गोद लेने से जुड़े बच्चों को भी कानूनी अधिकारों के मामले में समान सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है. लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों के अधिकारों को भी कानून के तहत संरक्षित किया गया है.

Gujarat यूसीसी में एकविवाह का नियम लागू किया गया है. इसके तहत पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करने पर प्रतिबंध रहेगा. विवाह और तलाक से जुड़े मामलों के लिए भी एक समान कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की गई है.

यूसीसी की प्रमुख व्यवस्थाओं में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी शामिल है. राज्य में ऐसे संबंधों को निर्धारित समय-सीमा और प्रक्रिया के तहत पंजीकृत कराना होगा. इससे संबंधित कानूनी अधिकारों और दायित्वों को भी कानून के तहत निर्धारित किया गया है.

Gujarat यूसीसी में अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को इसके प्रावधानों से छूट दी गई है. इसके पीछे आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और वैवाहिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना बताया गया है.

Gujarat में यूसीसी की दिशा में पहल 2022 में शुरू हुई थी. विधानसभा चुनाव से पहले राज्य Government ने समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की थी.

इसके बाद फरवरी 2024 में Gujarat Government ने यूसीसी की जरूरत और उसके संभावित स्वरूप का अध्ययन करने के लिए सेवानिवृत्त Supreme Court न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की. समिति ने राज्य में व्यक्तिगत नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन किया और यूसीसी के स्वरूप को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की.

मार्च 2026 में समिति की रिपोर्ट राज्य Government को सौंपे जाने के बाद विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया गया. Gujarat विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को विधेयक पारित किया. इसके बाद इसे President की मंजूरी के लिए भेजा गया. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भी विधेयक के पारित होने के बाद Gujarat Government और विधायकों को बधाई दी गई थी.

President की मंजूरी के साथ Gujarat उत्तराखंड के बाद यूसीसी कानून को अपनाने वाला दूसरा राज्य बन गया है. अब राज्य Government द्वारा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी अधिसूचनाओं और नियमों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.

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डीएससी