
गांधीनगर, 6 सितंबर . Gujarat Police हर जिले और कमिश्नरेट में खास ‘एंटी-नारकोटिक्स विंग’ बनाएगी. इन यूनिट्स को सात दिनों के भीतर काम शुरू करने का आदेश दिया गया है. यह कदम ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस’ (एनडीपीएस) एक्ट के तहत अपराधों की जांच की खास जिम्मेदारी विशेष टीमों को सौंपने के मकसद से उठाया गया है.
यह फैसला डायरेक्टर जनरल ऑफ Police (डीजीपी) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने लिया है. ‘एंटी-नारकोटिक्स विंग’ राज्यस्तरीय एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की तर्ज पर काम करेंगी.
यह कदम राज्य द्वारा ड्रग तस्करी और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के तहत उठाया गया है. इसकी घोषणा Sunday को की गई.
Police के अनुसार, Gujarat ने पिछले पांच सालों में एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,700 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं और 5,346 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
इसी दौरान, लगभग 13,600 करोड़ रुपए मूल्य के 1.36 लाख किलोग्राम से ज्यादा नशीले पदार्थ जब्त किए गए.
हर ‘एंटी-नारकोटिक्स विंग’ में आठ कर्मचारी होंगे. एक Police इंस्पेक्टर, एक Police सब-इंस्पेक्टर, दो असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर या हेड कॉन्स्टेबल और चार Police कॉन्स्टेबल. हर यूनिट के पास एक समर्पित गाड़ी और ड्राइवर भी होगा.
जिला स्तर पर ये यूनिट्स सुपरिटेंडेंट ऑफ Police (एसपी) की सीधी देखरेख में काम करेंगी.
चार बड़े कमिश्नरेट में से Ahmedabad और सूरत में दो-दो ‘एंटी-नारकोटिक्स विंग’ यूनिट्स होंगी जबकि वडोदरा और राजकोट में एक-एक यूनिट होगी. ये यूनिट्स संबंधित जॉइंट या एडिशनल कमिश्नर ऑफ Police की देखरेख में काम करेंगी.
‘एंटी-नारकोटिक्स विंग’ को विशेष टास्क फोर्स के तौर पर नामित किया जाएगा और उन्हें एनडीपीएस अपराधों से अलग कोई ड्यूटी नहीं सौंपी जाएगी.
उनकी जिम्मेदारियों में एएनटीएफ द्वारा पहचाने गए ड्रग तस्करों और ड्रग हॉटस्पॉट पर लगातार नजर रखना शामिल होगा.
वे ड्रग के आदी अपराधियों के खिलाफ ‘प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट’ के तहत निवारक कार्रवाई के लिए सीआईडी क्राइम को प्रस्ताव भी भेजेंगे.
इन विशेष यूनिट्स के गठन से नारकोटिक्स अपराधों का पता लगाने की स्थानीय Police स्टेशनों की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी.
हालांकि, Police प्रमुख ने निर्देश दिया है कि अगर ‘एंटी-नारकोटिक्स विंग’ द्वारा की गई जाच के दौरान स्थानीय Police की कोई लापरवाही या ढिलाई पाई जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.
मलिक ने पहले भी निर्देश दिया था कि स्थानीय Police अपने अधिकार क्षेत्र में नारकोटिक्स गतिविधियों के लिए जवाबदेह बनी रहे, भले ही मामलों का पता विशेष एजेंसियों द्वारा लगाया जाए.
Gujarat Police ने अपनी ‘ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी’ पर भी जोर दिया है, जिसके तहत ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में मदद करने वाली जानकारी देने वाले Policeकर्मियों और मुखबिरों को इनाम दिया जा सकता है.
राज्य ने उन कर्मचारियों के लिए ‘आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन’ की नीति भी शुरू की है जो अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करते हैं.
नशीले पदार्थों के खिलाफ रणनीति का एक और हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल है. Police ने बताया कि डार्क वेब पर गतिविधियों का पता लगाने, पैसों के लेन-देन का पता लगाने और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पहचान करने के लिए एनएआरआईटी नाम का एआई बेस्ड सॉफ्टवेयर बनाया गया है.
नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में सजा दिलाने की दर (कनविक्शन रेट) को बेहतर बनाने के मकसद से वैज्ञानिक जांच के तरीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
कानून लागू करने के साथ-साथ, राज्य नशीली दवाओं की लत से जूझ रहे युवाओं को काउंसलिंग और इलाज देने के लिए नशा मुक्ति केंद्रों को आधुनिक बनाने की योजना भी बना रहा है.
इस तरीके में नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई और नशीली दवाओं की लत से जूझ रहे लोगों के लिए पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) के उपाय, दोनों शामिल हैं.
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डीकेएम/पीएम
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