गुजरात के सैटलियो लैब्स ने रचा इतिहास, भारत का पहला समर्पित कमर्शियल थर्मल पेलोड तापस-1 लॉन्च

Ahmedabad, 24 अक्टूबर . India के तेजी से विकसित हो रहे स्पेसटेक क्षेत्र में Gujarat के स्टार्टअप सैटलियो लैब्स ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है. कंपनी ने 1 अक्टूबर 2026 को India का पहला समर्पित कमर्शियल थर्मल पेलोड तापस-1 अंतरिक्ष में लॉन्च किया. तापस का पूरा नाम थर्मल एक्सेस प्लेटफॉर्म फॉर एनालिटिक्स एंड सॉल्यूशंस-1 है. इसे अमेरिका में स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया और पृथ्वी से लगभग 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित कक्षा में एक सैटेलाइट के साथ स्थापित किया गया.

इस उपलब्धि को Gujarat के स्पेसटेक इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. तापस-1 पृथ्वी की सतह पर तापमान में होने वाले बदलावों से संबंधित उच्च-रिजॉल्यूशन तस्वीरें और डेटा जुटाने के लिए तैयार किया गया है. इसके माध्यम से मिलने वाली थर्मल जानकारी शहरी क्षेत्रों में गर्मी के प्रबंधन, कृषि, पानी की कमी की निगरानी और बाढ़ तथा जंगलों में आग जैसी आपदाओं की निगरानी में उपयोगी साबित हो सकती है.

तापस-1 का वजन लगभग तीन किलोग्राम है. इसे सैटेलाइट पर पेलोड के रूप में स्थापित किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की सतह से निकलने वाले तापीय उत्सर्जन का विश्लेषण करना और अलग-अलग स्थानों पर तापमान में होने वाले बदलावों की जानकारी जुटाना है. इससे प्राप्त डेटा के आधार पर पृथ्वी की सतह पर तापमान के पैटर्न को समझने और विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले बदलावों की निगरानी करने में मदद मिल सकती है. शहरी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी, कृषि भूमि की स्थिति, पानी की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी जैसे क्षेत्रों में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

सैटलियो लैब्स के को-फाउंडर और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) डॉ. आर घोष ने बताया कि थर्मल डेटा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके जरिए दिन और रात, दोनों समय अनुमान लगाया जा सकता है. यह तकनीक सूर्य के प्रकाश पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पृथ्वी की सतह से निकलने वाले उत्सर्जन पर आधारित है. पृथ्वी की सतह से तापीय उत्सर्जन लगातार होता रहता है. इसी कारण थर्मल डेटा का इस्तेमाल केवल दिन के समय तक सीमित नहीं रहता और इससे निगरानी की निरंतर प्रक्रिया को सहायता मिलती है.

Ahmedabad के टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. नरोत्तम साहू ने कहा कि डीप टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके कई बड़ी समस्याओं को अवसरों में बदला जा सकता है. उन्होंने आपदा प्रबंधन, कृषि उत्पादन बढ़ाने, मानसून, बादलों और संसाधनों की कमी से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया. साहू ने कहा कि उन्नत इंफ्रारेड कैमरों और अंतरिक्ष आधारित निगरानी तकनीकों के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों की स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है. इससे समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान के लिए आवश्यक जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है.

तापस-1 से मिलने वाला थर्मल डेटा कृषि और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी के लिए उपयोगी साबित होने की संभावना रखता है. इसके साथ ही, बाढ़ और जंगलों में आग जैसी घटनाओं की निगरानी में भी ऐसी तकनीक महत्वपूर्ण हो सकती है. हालांकि, इन क्षेत्रों में इसका वास्तविक योगदान उपलब्ध डेटा और उसके विश्लेषण के इस्तेमाल पर निर्भर करेगा.

Gujarat Government ने Chief Minister भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य में स्पेसटेक सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए Gujarat स्पेसटेक पॉलिसी 2025-30 घोषित की है. इस नीति का उद्देश्य Gujarat को स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करना है. जानकारी के अनुसार, Gujarat देश का पहला राज्य है जिसने स्पेसटेक क्षेत्र के लिए इस तरह की नीति घोषित की है.

इस नीति के तहत स्पेसटेक क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप और कंपनियों को विभिन्न प्रकार की सहायता दी जाती है. इनमें लॉन्च खर्च के लिए सहयोग, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) से संबंधित सहायता और परीक्षण सुविधाओं के लिए सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन शामिल हैं.

सैटलियो लैब्स के को-फाउंडर और मुख्य रणनीति अधिकारी (सीएसओ) उर्मिल बखाई ने Gujarat Government के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि राज्य Government की स्पेसटेक नीति से कंपनी को प्रोत्साहन और लाभ मिला है. उन्होंने India Government की नई स्पेसटेक नीति से भी कंपनी को मिलने वाले सहयोग का उल्लेख किया.

Gujarat स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन (जीएसईएम), गांधीनगर की मिशन डायरेक्टर नेहा कुमारी ने कहा कि Chief Minister के नेतृत्व में Gujarat ने स्पेसटेक नीति बनाने के साथ स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क की स्थापना की है. इसके अलावा, इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए साझा तकनीकी सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई है. उन्होंने बताया कि राज्य में स्पेसटेक से जुड़ा इकोसिस्टम लगातार विकसित हो रहा है. उन्होंने सैटलियो लैब्स की ओर से तापस पेलोड लॉन्च किए जाने को इसी विकास का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया. साथ ही, नीति, विनिर्माण सुविधाओं और तकनीकी सहयोग से राज्य में स्पेसटेक कंपनियों के लिए काम करने का वातावरण तैयार हुआ है. इससे नवाचार और नई तकनीकों के विकास को प्रोत्साहन मिल रहा है.

सैटलियो लैब्स की उपलब्धि Gujarat में विकसित हो रहे डीप-टेक इकोसिस्टम की ओर भी संकेत करती है. राज्य में कंपनियां सॉफ्टवेयर आधारित एप्लिकेशन से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में उन्नत हार्डवेयर तथा तकनीक विकसित करने पर काम कर रही हैं.

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/जीकेटी