
भावनगर , 25 अक्टूबर . Gujarat के भावनगर जिले की तलजा तालुका में कोडिया गांव के किसान दानुभाई सोलंकी पूरे राज्य के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं. प्रगतिशील किसान दानुभाई ने Gujarat Government की योजनाओं का लाभ उठाकर और अपनी मेहनत से विदेशी फल एवोकाडो की खेती शुरू की और आज वे इससे लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं. रेगुलर सिंचाई और साइंटिफिक खेती से उनके फार्म में एवोकाडो का खूब उत्पादन हो रहा है.
प्रगतिशील किसान दानुभाई सोलंकी ने बताया कि आज से 3-4 साल पहले हमने एवोकाडो का रोपण किया था. शुरुआत में 50 पौधों से रोपण शुरू किया था. इस साल 15 पौधे फल देने लगे हैं और एक पौधे से लगभग 60 किलो फल निकल रहा है. एवोकाडो में दो-तीन तरह की किस्में आती हैं और अपने यहां Gujarat में यह होता है. दूसरी किस्में ऐसी हैं जो मार्केट में चलती नहीं हैं, एवोकाडो के कुछ फल ऐसे होते हैं जिन्हें बेचने में समस्या होती है.
दानुभाई की इस उपलब्धि से कोडिया गांव के दूसरे किसान बेहद खुश हैं. दानुभाई उन्हें एवोकाडो की खेती सिखा रहे हैं, ताकि वे भी इसके जरिए अपनी इनकम बढ़ा सकें.
किसान अजाभाई भादरका ने कहा कि हमारे गांव के लिए यह गर्व की बात है दानुभाई की खेती देखने के लिए बाहर से लोग आते हैं. किसान जानना चाहते हैं कि दानुभाई किस तरह कम पढ़ाई-लिखाई के बावजूद इस मुकाम पर पहुंचे हैं. अलग-अलग वैरायटी खेत में देखने से लोग बहुत खुश होते हैं.
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एवोकाडो की मेडिसिनल वैल्यू बहुत ज्यादा है और स्वास्थ्य के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है. इसी वजह से बाजार में एवोकाडो की अच्छी खासी डिमांड है और किसानों की उपज हाथों-हाथ बिक जाती है.
भावनगर के कृषि नायब नियामक एमबी बाघमसी बताते हैं कि एवोकाडो सबसे अच्छे फलों में से एक माना जाता है क्योंकि इसमें बहुत अच्छी मात्रा में प्रोटीन और फैट होता है. इसमें शुगर की मात्रा कम होती है इसलिए डायबिटीज के मरीज भी इसे खा सकते हैं. अभी इसका बाजार भाव 800 से 1500 रुपए प्रति किलोग्राम तक है. दुनियाभर में इसकी बहुत डिमांड है, इसलिए इस फसल का भविष्य भी बहुत अच्छा है.
Chief Minister भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य Government किसानों की इनकम बढ़ाने में जुटी है और इसी के तहत उन्हें परंपरागत फसलों के साथ बागवानी करने व एवोकाडो, ड्रैगन फ्रूट, शतावरी और अंजीर जैसे फलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
गांधीनगर के कृषि संयुक्त निदेशक बीजी राठौड बताते हैं कि बागवानी विभाग द्वारा सहायता योजनाएं दी जाती हैं जैसे कि डेंस फार्मिंग से बुवाई करें या फिर नई फसल इंट्रोड्यूस करें, उसके लिए भी सहायता दी जाती है. इसके अलावा वैल्यू एडेड उपज के लिए भी बागवानी विभाग द्वारा सहायता प्रदान की जाती है.
दानुभाई खेती के लिए पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे नेट हाउस, ग्रीन हाउस और ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक विधियों का इस्तेमाल करके कम समय और कम लागत में ज्यादा उपज और ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं.
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एएसएच/
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