
गांधीनगर, 25 अक्टूबर . Gujarat Government के ‘रक्षा शक्ति स्कूल’ में छात्रों को उनकी पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, शारीरिक फिटनेस और टीम वर्क का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य छात्रों को केंद्रीय सशस्त्र Police बलों (सीएपीएफ) और राज्य Police बलों में करियर के लिए तैयार करना है.
गांधीनगर के लावड क्षेत्र में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के परिसर में स्थित यह आवासीय स्कूल राज्य Government द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत चलाया जाता है.
यह स्कूल कक्षा 6 से कक्षा 12 तक शिक्षा प्रदान करता है, जिसमें कक्षा शिक्षण के साथ-साथ शारीरिक प्रशिक्षण और छात्रों की मानसिक और शारीरिक क्षमताओं को विकसित करने के उद्देश्य से गतिविधियां शामिल हैं.
यह स्कूल सैनिक स्कूल की तर्ज पर स्थापित किया गया था ताकि सुरक्षा और रक्षा क्षेत्रों में शामिल होने के इच्छुक छात्रों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके.
इसके कार्यक्रम में अकादमिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ अनुशासन, फिटनेस, टीम वर्क और जिम्मेदारी की भावना पर विशेष जोर दिया जाता है.
छात्र अपनी दिनचर्या के हिस्से के रूप में अभ्यास में भाग लेते हैं, जबकि फुटबॉल और वॉलीबॉल जैसे खेलों को उनके शारीरिक और मानसिक विकास में सहयोग देने के लिए शामिल किया जाता है.
स्कूल का उद्देश्य छात्रों को उनकी औपचारिक शिक्षा जारी रखते हुए वर्दीधारी सेवाओं में करियर से जुड़े अनुशासन और शारीरिक आवश्यकताओं से परिचित कराना है.
अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना और सुरक्षा क्षेत्र में अवसरों का लाभ उठाने में मदद करना है.
स्कूल के छात्र आयुष परमार और स्मित कुमार पटेल ने कार्यक्रम में अपने अनुभवों के बारे में बताया.
स्कूल की शिक्षिका रितु ने छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास में ड्रिल और खेलों की भूमिका पर प्रकाश डाला.
रक्षा शक्ति स्कूल के निदेशक बीआर राव ने विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से छात्रों को केंद्रीय सशस्त्र Police बलों और राज्य Police बलों में करियर के लिए तैयार करने पर संस्थान के फोकस के बारे में बताया.
स्कूल शिक्षा को शारीरिक फिटनेस और संरचित गतिविधियों के साथ जोड़कर, संस्थान का लक्ष्य छात्रों को Police और अन्य सुरक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रारंभिक आधार प्रदान करना है, साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यकताओं के लिए तैयार करना है.
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एमएस/
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