गहरे मतभेदों के बीच आम सहमति बनाने में सफल रहा ब्रिक्स: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

New Delhi, 14 सितंबर . विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि सफल ब्रिक्स समिट ने India की मजबूत आयोजन क्षमता और गहरे भू-Political मतभेदों के बावजूद देशों के बीच आम सहमति बनाने की उसकी काबिलियत को दिखाया.

जयशंकर ने बताया कि समिट में 32 प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया, जिनमें 11 ब्रिक्स सदस्य देशों, 10 पार्टनर देशों, चार क्षेत्रीय संगठनों और सात अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे. कई देशों का प्रतिनिधित्व उनके राष्ट्राध्यक्षों या Government प्रमुखों ने किया, जिनमें रूसी President व्लादिमीर पुतिन, चीनी President शी जिनपिंग, इंडोनेशियाई President प्राबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीकी President सिरिल रामफोसा, ईरानी President, इथियोपियाई Prime Minister अबिय अहमद, यूएई के क्राउन प्रिंस और मिस्र के President अब्देल फतह अल-सिसी शामिल थे.

दुनियाभर में तनाव के बीच समिट के महत्व पर जोर देते हुए जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व संघर्ष पर आम सहमति बनाने में कामयाब रहा. सदस्यों ने शांति, सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घकालिक समझ की अपील की. साथ ही बिना रुकावट वाले वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा प्रवाह और नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि समिट ने नेताओं के बीच खुली और सहज बातचीत का माहौल भी बनाया, जिसमें ऐसे नेता भी शामिल थे जो शायद अलग हालात में कभी नहीं मिल पाते.

जयशंकर के अनुसार, समिट का व्यापक एजेंडा आर्थिक विकास, तकनीक और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को मजबूत करने पर केंद्रित था. उन्होंने कहा कि सुधार और लचीलापन ऐसे विषय बनकर उभरे जिन्होंने ब्रिक्स सदस्यों को आम सहमति बनाने में मदद की.

आतंकवाद पर, जयशंकर ने आम सहमति को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की निंदा की, जिसमें सीमा-पार आतंकवाद भी शामिल है, और 22 अप्रैल, 2025 के पहलगाम आतंकी हमले को स्पष्ट रूप से अस्वीकार्य माना. उन्होंने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस और इससे निपटने में दोहरे मापदंडों को खारिज करने की समूह की अपील पर भी जोर दिया.

जयशंकर ने कहा कि समिट में Prime Minister Narendra Modi के ‘बातचीत, कूटनीति और विकास’ के संदेश की झलक दिखी, जिसे उन्होंने कहा कि दुनिया भर में सराहा गया.

अपनी बात खत्म करते हुए जयशंकर ने कहा कि हालांकि कई लोगों ने भविष्यवाणी की थी कि समिट सफल नहीं हो पाएगा, लेकिन यह हुआ, New Delhi में Prime Minister मोदी के नेतृत्व में हुआ.

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