
New Delhi, 27 अक्टूबर . निचले गंगा क्षेत्र में (बिहार, Jharkhand और पश्चिम बंगाल शामिल) नदी तट का कटाव एक गंभीर समस्या बन गया है. Tuesday को दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग द्वारा आयोजित बैठक इस समस्या के स्थायी समाधान और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.
पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिले मुर्शिदाबाद, मालदा और नादिया विशेष रूप से खतरे में हैं. गंगा (India में)-पद्मा (बांग्लादेश में) नदी प्रणाली के किनारे नदी तट का कटाव एक मौसमी आपदा से बढ़कर एक दीर्घकालिक मानवीय और विकासात्मक संकट बन गया है. हर मानसून में, नदी बड़े पैमाने पर मिट्टी के कटाव से मालदा और मुर्शिदाबाद के भूभाग को बदल देती है, जिसके परिणामस्वरूप खेत, घर, स्कूल, मंदिर, सड़कें और साथ ही नदी के किनारे बसे हजारों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है.
Sunday को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने Chief Minister सुवेंदु अधिकारी की दिल्ली यात्रा से पहले मालदा के प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया. Chief Minister सुवेंदु अधिकारी की दिल्ली यात्रा में इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की उम्मीद है.
मालदा में इस खतरे की सबसे भयावह तस्वीर सामने आती है. इस जिले के बड़े हिस्से में दशकों से लगातार भूस्खलन हो रहा है. अधिकारियों ने हाल ही में चेतावनी दी है कि गंगा के बदलते मार्ग के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, जो केवल गांवों के विस्थापन तक ही सीमित नहीं होंगे.
मुर्शिदाबाद के लालगोला क्षेत्र से मिली रिपोर्टों में बताया गया है कि बढ़ते कटाव के कारण पूरी बस्तियां खतरे में हैं. रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अकेले तारानगर गांव में ही लंबे समय तक चले कटाव के कारण 120 से अधिक परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं, जो नदी किनारे बसे समुदायों में देखी जा रही एक व्यापक समस्या को दर्शाता है.
अलग-अलग रिपोर्टों में अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि नदी तट के कटाव की समस्या से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल Government, संबंधित जल संसाधन एजेंसी और राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड (एनएचपीसी) के बीच 2018 में हुआ समझौता अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है. इसलिए वे इस खतरे से निपटने के लिए एक कारगर योजना की तलाश में हैं और नदी तट के कटाव को रोकने के उद्देश्य से बनाई गई योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए राज्यों के बीच समन्वय पर जोर दे रहे हैं.
राज्य के अधिकारियों ने पड़ोसी Jharkhand के राजमहल के पास के इलाकों में भारी मात्रा में गाद जमा होने की ओर इशारा करते हुए कहा है कि नदी के बदलते जल प्रवाह के कारण मालदा में बाढ़ और कटाव हो रहा है. इससे पश्चिम बंगाल, बिहार और Jharkhand को शामिल करते हुए गाद निकालने और अंतरराज्यीय समन्वय पर चर्चा शुरू हो गई है.
आधिकारिक टिप्पणियों के अनुसार, बंगाल के जलोढ़ मैदानों में बहने वाली गंगा नदी एक ‘घुमावदार नदी’ है, जो अत्यधिक गतिशील है. मानसून के दौरान, भारी जल प्रवाह और बाढ़ से नदी के किनारे कमजोर हो जाते हैं, और बाद में जलभराव से भूस्खलन होता है. बाढ़, गाद जमाव और नदी के मार्ग परिवर्तन का यह चक्र धीरे-धीरे कृषि भूमि, बस्तियों, सड़कों, स्कूलों और सार्वजनिक अवसंरचना को नष्ट कर रहा है.
राज्यसभा में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा दिए गए उत्तर के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच पश्चिम बंगाल में बाढ़ से कुल नुकसान 16,083 करोड़ रुपए से अधिक था, जिससे 40 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए और 188 लोगों की मृत्यु हुई.
संयोगवश, फरक्का बैराज अक्सर अपरदन पर चर्चा का विषय रहा है, विभिन्न अध्ययनों और रिपोर्टों ने गाद की गति और नदी के व्यवहार में बदलाव को मालदा और मुर्शिदाबाद के कुछ हिस्सों में तीव्र अपरदन से जोड़ा है.
हालांकि, विशेषज्ञों के बीच प्राकृतिक नदी प्रक्रियाओं के सापेक्ष इसकी भूमिका की सीमा को लेकर मतभेद हैं.
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एमएस/
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