
Mumbai , 5 सितंबर . ब्राजील के दिग्गज फुटबॉलर रहे और टीम को 2 बार विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले काफू ने Saturday को Mumbai की जरूरतमंद युवा लड़कियों के साथ फुटबॉल फील्ड पर समय बिताया. उन्होंने युवा खिलाड़ियों को फुटबॉल के गुर बताने के साथ ही खेल और शिक्षा के जरिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया.
काफू ने Mumbai के ‘ड्रीमिंग इन स्लम्स फाउंडेशन’ की लड़कियों के साथ समय बिताया. वह उनके साथ एक मैत्री मैच में शामिल हुए. यह फाउंडेशन जरूरतमंद शहरी समुदाय की युवा लड़कियों के साथ काम करता है, फुटबॉल का इस्तेमाल लाइफ स्किल्स, आत्मविश्वास और अवसर ढूंढने के लिए करता है. यह प्रोग्राम छह से 16 साल की लड़कियों के लिए है.
इस अवसर पर काफू ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “फुटबॉल बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने में मदद करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है. जो बच्चे फुटबॉल पढ़ते और खेलते हैं, उनके लिए मेरी राय है कि उन्हें इसी रास्ते पर चलते रहना चाहिए. खेल दुनिया में सामाजिक जुड़ाव के सबसे बड़े तरीकों में से एक है.”
उन्होंने कहा, “खेल आपको भविष्य, शिक्षा और समाजीकरण देता है. यह आपको बहुत सम्मान भी देता है. मुझे लगता है कि स्कूल और फुटबॉल का यह मेल एकदम सही है. बच्चे सामाजिक रूप से शामिल हो सकते हैं और ट्रेनिंग का सम्मान कर सकते हैं. ऐसा तरीका भविष्य के लिए बेहतर है.”
युवा खिलाड़ियों से मिलने के बाद काफू खुश दिखे और उनके प्यार और सम्मान से प्रभावित हुए.
उन्होंने कहा, “यह बहुत बढ़िया था. मुझे ऐसा लग रहा है कि दुनिया मुझसे प्यार करती है. यह बहुत खुशी की बात है. मैंने उन बच्चों से प्यार और सम्मान महसूस किया, जिन्होंने मुझे खेलते हुए लगभग कभी नहीं देखा था. मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जिसे समझाया नहीं जा सकता. मैं यहां India में आकर बहुत खुश हूं. फाउंडेशन बहुत अच्छा है.”
ब्राजील के पूर्व कप्तान ने India में फुटबॉल के विकास पर कहा, “India एक ऐसा देश है जो हर साल खेल में, खासकर फुटबॉल में ज्यादा निवेश कर रहा है. मुझे लगता है कि अगर हम निवेश करना और पेशेवर खिलाड़ियों को लाना शुरू कर दें, तो India में दुनिया की बेस्ट फुटबॉल टीमों में से एक बनने की बहुत क्षमता है.”
काफू के साथ मैदान पर खेलने का अनुभव लड़कियां कभी नहीं भूल पाएंगी.
सोनाली यादव ने से कहा, “मैं एक मध्यवर्गीय परिवार से हूं. मेरे पिता एक ऑटो ड्राइवर हैं और मेरी मां एक हाउसवाइफ हैं. मुझे एक एनजीओ के साथ फुटबॉल खेलने का मौका मिला, और मैं अपने कोच, गुलाब शाह और प्रजोधी को थैंक यू बोलना चाहूंगी. ब्राजील के महान खिलाड़ी काफू ने संदेश और प्रेरणा ने हम पर गहरी छाप छोड़ी.”
सोनल ने कहा, “उन्होंने हमें कभी हार न मानने की सलाह दी. शुरुआत में उन्हें कई बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने 2 बार (1994 और 2002) ब्राजील के लिए विश्व कप जीता. वह हमें सिखाते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, आपको कभी हार नहीं माननी चाहिए. वह बहुत अच्छे खिलाड़ी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो बच्चों के साथ काम करते हैं. मेरा सपना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर India का प्रतिनिधित्व करना है.”
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पीएके
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