
हलद्वानी, 25 अक्टूबर . उत्तराखंड के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अमृतपुर-काठगोदाम बाईपास के तहत 75 मीटर का पुल और लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा मार्ग बनाया जा रहा है, जिसके बनने से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रानीखेत और कौसानी जाने वाले लोगों और पर्यटकों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी. वहीं हल्द्वानी को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सपा Government के दौरान हुए खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा कांड को उत्तराखंड नहीं भूला है और ऐसे बयान देकर वे पुराने घाव कुरेद रहे हैं.
उत्तराखंड के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “जो अमृतपुर कट गोदाम बाइपास बन रहा है, उसमें 75 मीटर का पुल भी बनाया जाना है. यह दानीजाला से लेकर हमारे तिरसला घाट के आसपास से होकर निकलेगा. लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा यह मार्ग है. इसके बन जाने से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, कौसानी और रानीखेत जैसे क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. यहां अक्सर भारी जाम लगता था और बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था.”
उन्होंने कहा कि यह मार्ग बन जाने से आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा. हमारा प्रयास है कि इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए. इसके लिए पूरी धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है. आज मैंने संबंधित कार्यदायी संस्था और पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों को बुलाकर निर्देश दिए हैं कि इस परियोजना को शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि अगले पर्यटन सीजन से पहले लोगों को इसका लाभ मिल सके.
हल्द्वानी को लेकर Samajwadi Party के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की टिप्पणी पर सीएम धामी ने कहा कि उनसे हम और क्या उम्मीद कर सकते हैं? उनके पिताजी मुलायम सिंह यादव जब उत्तर प्रदेश के Chief Minister थे और केंद्र में पी. वी. नरसिम्हा राव की Government थी, उसी दौरान खटीमा गोलीकांड हुआ, मसूरी गोलीकांड हुआ और रामपुर तिराहा कांड हुआ. मुजफ्फरनगर में सारी मर्यादाएं तार-तार हो गई थीं. हमारी माताओं और बहनों के साथ जो अमानवीय घटनाएं हुई थीं, उनकी पीड़ा आज भी हमारे स्मरण में है.
उन्होंने कहा कि आज फिर उन्होंने उत्तराखंडवासियों के पुराने घावों को कुरेदने का काम किया है. इतने अमर्यादित बयान की उनसे अपेक्षा नहीं थी. उनके परिवार में भी उत्तराखंड से संबंध रखने वाले लोग हैं. इसलिए उन्हें इस प्रकार का बयान नहीं देना चाहिए था. उन्हें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि उत्तराखंड वीरभूमि है, देवभूमि है. उनकी धर्मपत्नी भी यहां से आती हैं. उत्तराखंड के वीरों ने India की सुरक्षा और रक्षा में, चाहे प्रथम विश्व युद्ध हो, द्वितीय विश्व युद्ध हो या स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लड़े गए युद्ध, हर अवसर पर अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय दिया है.
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात प्रत्येक पांच सैनिकों में से एक सैनिक देवभूमि और वीरभूमि उत्तराखंड का है. गंगा और यमुना जैसी जीवनदायिनी नदियां यहीं से निकलती हैं और पूरे देश को जल प्रदान करती हैं. यहां बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम हैं, आदि कैलाश है, जागेश्वर धाम है. यह आध्यात्मिक चेतना की भूमि है. इस धरती ने ऐसे-ऐसे सपूत दिए हैं जिन्होंने मां भारती का गौरव बढ़ाया है.
सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को यदि न्याय यात्रा निकालनी है तो निकाले. चर्चा में आने के लिए प्रयास करना उनका अधिकार है, लेकिन उन्हें अपना हिसाब भी देना चाहिए कि जब वे Government में थे तब उन्होंने क्या किया? कितना भ्रष्टाचार हुआ? आज वे भ्रष्टाचार और भर्तियों की बात बड़े जोर-शोर से करते हैं. न्याय यात्रा में उन्हें यह भी बताना चाहिए कि पलायन कैसे रुकेगा, युवाओं को रोजगार कैसे मिलेगा. उन्होंने अपने शासनकाल में क्या उपलब्धियां हासिल कीं और किन कमियों के लिए वे जिम्मेदार हैं. केवल झूठे मुद्दों को उठाकर या विभिन्न वर्गों के नाम पर भ्रम फैलाकर राजनीति नहीं की जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में किसी व्यक्ति या किसी जाति के खिलाफ कोई शुद्धि यज्ञ नहीं हुआ था. वहां जो उन्मादी और भड़काऊ नारे लगाए गए थे तथा जो अव्यवस्था फैलाई गई थी, उसके बाद शुद्धिकरण का कार्यक्रम किया गया था. उसे किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना गलत है.
सीएम धामी ने कहा कि जहां तक छात्रों की आवाज का सवाल है. मैं कहता हूं कि वह छात्रों की गूंज नहीं, बल्कि झूठ की गूंज है. वे कहते हैं कि पूरे देश में कहीं भी नकल के मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई. मैं पूछना चाहता हूं कि उत्तराखंड में हमने कितने लोगों को जेल भेजा? सौ से अधिक नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई की गई और हजारों युवाओं को पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से अवसर दिए गए.
उन्होंने कहा कि वे न्याय यात्रा की बात करते हैं, लेकिन हमने न्याय करके दिखाया है. अंकिता हमारी बेटी थी, पूरे उत्तराखंड की बेटी थी. उसके मामले में तीनों आरोपी आज जेल में हैं और कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा भुगत रहे हैं. न्यायपालिका और व्यवस्था पर भरोसा होना चाहिए. बार-बार उस बेटी की पीड़ा को Political लाभ के लिए सामने लाना उचित नहीं है. क्या अपनी Political जमीन बचाने के लिए हर दुखद घटना का इस्तेमाल किया जाएगा?
उन्होंने कहा कि आप संविधान और व्यवस्थाओं से ऊपर नहीं हो सकते. यदि न्याय यात्रा निकालनी है तो निकालें, लेकिन उसका उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए. आज छोटी-छोटी बच्चियों को धमकाए जाने की घटनाओं के ऑडियो सामने आ रहे हैं. देहरादून की घटनाएं भी सबके सामने हैं.
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