
New Delhi, 30 अक्टूबर . आजकल हम सबकी लाइफ इतनी बिजी हो गई है कि खाने का भी टाइम नहीं मिलता. कई लोग ऑफिस का काम करते-करते लंच कर लेते हैं, तो कई लोग टीवी या मोबाइल देखते हुए डिनर निपटा देते हैं. हमें लगता है कि चलो पेट तो भर ही रहा है, लेकिन आयुर्वेद कहता है कि आप क्या खा रहे हैं, उससे ज्यादा जरूरी है कि आप कैसे खा रहे हैं.
आयुर्वेद कहता है कि खाना हमेशा शांत, साफ जगह पर और आराम से बैठकर खाना चाहिए. टीवी देखते हुए, जोर-जोर से हंसते हुए या बातें करते हुए खाना खाने से हमारा ध्यान खाने पर नहीं रहता. इससे खाना ठीक से पचता नहीं है. जब खाने बैठें, तो टीवी बंद कर दें और सिर्फ खाने का मजा लें. खाने को न तो बहुत जल्दी-जल्दी निगलें और न ही बहुत धीरे-धीरे. हर कौर को अच्छे से चबा-चबाकर खाएं.
बहुत से लोगों को तेज गर्म खाना खाने की आदत होती है, तो कुछ लोग फ्रिज से निकालकर ठंडा खाना ही खा लेते हैं. दोनों ही गलत है. आयुर्वेद के अनुसार खाना हमेशा सामान्य तापमान का होना चाहिए. बहुत गर्म या बहुत ठंडा खाना पाचन शक्ति को कमजोर कर देता है.
हमारी थाली में सिर्फ एक ही स्वाद नहीं होना चाहिए. आयुर्वेद कहता है कि खाने में छह रस – मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला, सभी का होना जरूरी है. इससे शरीर को पूरा पोषण मिलता है. कोशिश करें कि खाने की शुरुआत मीठी चीजों जैसे फल से करें, बीच में खट्टे और नमकीन पदार्थ लें और अंत में कड़वा या कसैला जैसे सलाद लें.
अक्सर लोग खाना खाने से ठीक 15 मिनट पहले और खाने के तुरंत बाद खूब सारा पानी पी लेते हैं. आयुर्वेद कहता है कि ऐसा करने से पाचन अग्नि बुझ जाती है. अगर प्यास लगे तो खाने के बीच में थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पी सकते हैं.
दिन का खाना आप भरपेट खा सकते हैं, लेकिन रात का खाना हमेशा हल्का होना चाहिए. और सबसे जरूरी बात, रात का खाना सोने से कम से कम 3 घंटे पहले खा लेना चाहिए. खाने के बाद तुरंत सोने से खाना पचता नहीं है. आयुर्वेद में कहा गया है कि रात के खाने के बाद कम से कम 100 कदम जरूर टहलें और फिर थोड़ी देर बाईं करवट लेटें. इससे पाचन बहुत अच्छा होता है.
खाना खाते ही जिम जाना, भारी वजन उठाना या दिमाग का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करना गलत है. खाने के बाद शरीर को थोड़ा आराम चाहिए ताकि वह खाने को पचा सके.
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पीआईएम/एबीएम
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