
New Delhi, 9 सितंबर . रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि India और श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने कहा कि समुद्र दोनों देशों को अलग नहीं करता, बल्कि लोगों से लोगों के बीच गहरे और स्थायी संबंधों के अनूठे बंधन के माध्यम से जोड़ता है. दोनों देश केवल लंबे समय से मित्र और पड़ोसी देश ही नहीं हैं, बल्कि साझा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत विरासत से जुड़े हुए महत्वपूर्ण साझेदार भी हैं.
राजनाथ सिंह Wednesday को कोलंबो में भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि पर आयोजित डेक स्वागत समारोह को संबोधित कर रहे थे. नौसेना का यह युद्धपोत श्रीलंका विजिट पर है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि आईएनएस उदयगिरि की श्रीलंका यात्रा India की इस प्रतिबद्धता और इच्छा का प्रतीक है कि वह श्रीलंकाई मित्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लोगों के कल्याण के लिए काम करना चाहता है. रक्षा मंत्री ने बताया कि आईएनएस उदयगिरि श्रीलंका के लिए महत्वपूर्ण उपकरण और कलपुर्जे लेकर पहुंचा है. यह रक्षा कूटनीति के तहत की जा रही पहल है. सहायता के रूप में श्रीलंकाई वायुसेना के लिए इंद्र एमके-2 रडार के कलपुर्जे, श्रीलंकाई नौसेना के जहाज सयूरा के लिए कलपुर्जे और श्रीलंकाई नौसेना के लिए लिए अन्य उपकरण शामिल रहे.
राजनाथ सिंह ने कहा कि क्षमता निर्माण India और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का एक मजबूत स्तंभ रहा है. India लगातार श्रीलंकाई सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने और उनकी रुचियों तथा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सहयोग करने का प्रयास करता रहा है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग का विशेष महत्व है. यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें India और श्रीलंका भविष्य में और अधिक करीबी तथा गहरे सहयोग की संभावनाएं देखते हैं. उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के साझा हित हैं और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है.
उन्होंने India की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि एक पड़ोसी वही होता है जो जरूरत के समय मदद के लिए आगे आता है. यह मदद केवल कर्तव्य के रूप में नहीं, बल्कि गहरी मित्रता और स्नेह की मजबूत पुष्टि के रूप में होती है. India और श्रीलंका के संबंध केवल औपचारिक राजनयिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, जो दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं.
उन्होंने कहा कि India श्रीलंका के सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रतिबद्ध साझेदार बना रहेगा. आने वाले समय में रक्षा सहयोग के साथ-साथ प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को और आगे बढ़ाया जाएगा.
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जीसीबी/डीकेपी
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