कैबिनेट ने कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपए की योजना को दी मंजूरी

New Delhi, 28 अक्टूबर . Prime Minister Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Wednesday को कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (सीएमपीएस) को मंजूरी दे दी है. वित्त वर्ष 2039-40 तक लागू रहने वाली इस योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया गया है. इस योजना का उद्देश्य India में विश्वस्तरीय कंटेनर निर्माण इकोसिस्टम विकसित करना, आयात पर निर्भरता कम करना और समुद्री एवं लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाना है.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह योजना नई कंटेनर निर्माण इकाइयों की स्थापना के साथ-साथ मौजूदा इकाइयों के विस्तार को भी प्रोत्साहन देगी. कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने की यह योजना केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित की गई थी.

बयान के अनुसार, योजना के तहत Government कंटेनर निर्माताओं को कई तरह की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी. इंटरेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस (आईएसए) के लिए 859 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत नई (ग्रीनफील्ड) इकाइयों और मौजूदा (ब्राउनफील्ड) इकाइयों के विस्तार के लिए लिए गए पात्र टर्म लोन पर 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी दी जाएगी.

इसके अलावा, ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस (ओईए) के लिए 8,891 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. इसके तहत वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुरूप निर्मित और बेचे गए कंटेनरों पर वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिससे घरेलू निर्माताओं की लागत कम होगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी.

वहीं, परीक्षण और प्रमाणीकरण सुविधाओं के विकास के लिए 150 करोड़ रुपए का अलग प्रावधान किया गया है, जिससे डायनेमिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग जैसी साझा अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जा सकें.

Government का अनुमान है कि इस योजना के लागू होने के बाद India की वार्षिक कंटेनर निर्माण क्षमता में लगभग दस गुना वृद्धि होगी और यह बढ़कर 7.5 लाख टीईयू तक पहुंच सकती है. इससे India न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा, बल्कि गुणवत्ता वाले शिपिंग कंटेनरों के वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में भी उभर सकता है.

इस योजना से देश की समुद्री और लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी तथा वैश्विक आपूर्ति संकटों के समय आत्मनिर्भरता बढ़ेगी.

Government के अनुसार, इस पहल से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है. साथ ही कॉर्नर कास्टिंग, विशेष स्टील, लकड़ी के फ्रेम, पेंट और अन्य सहायक उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलेगा.

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डीबीपी