
Mumbai , 3 अक्टूबर . बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कैप्टन स्मित पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया की आलोचना की. उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर बार-बार विरोध करने का आरोप लगाया. साथ ही नशीली दवाओं के खिलाफ मोदी Government की कोशिशों के तहत नार्को-टेररिस्ट नवप्रीत सिंह को तुर्की से वापस लाए जाने का स्वागत किया.
उन्होंने Saturday को समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि Dubai का जो प्लेन हाईजैक विफल किया गया, उसको 72 घंटे से ऊपर हो गए हैं. कैप्टन स्मित की बहादुरी, उनके साहस के किस्से, उनकी प्रशंसा पूरा विश्व कर रहा है.
अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप, इजराइली प्राइम मिनिस्टर बेंजामिन नेतन्याहू और Prime Minister मोदी ने तो स्वयं उनसे Friday को बात भी की, लेकिन राहुल गांधी में इतना भी शिष्टाचार नहीं है कि वह कैप्टन स्मित के पक्ष में एक पोस्ट करें, उनको बधाई दें और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लें. ये क्या मानसिकता है कांग्रेस पार्टी की. कहीं न कहीं अब लोगों को ऐसा लगने लगा है कि शायद राहुल गांधी की सहानुभूति उस दूसरे पायलट के साथ हैं, जो उस प्लेन को हाईजैक करना चाहता था. यह हम इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि पिछले 3 वर्षों में हमने देखा है किस प्रकार से प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी ने अपने आर्टिकल्स लिखकर इजरायल को दुत्कारा है.
इसके साथ ही एक और बात पर गौर करना होगा. Friday को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने इमरान मसूद को स्टेट का वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया. इमरान मसूद कौन है? आज से कुछ महीनों पहले इमरान मसूद ने एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने हमास की तुलना शहीद भगत सिंह से की थी.
जब कांग्रेस हमास के पक्ष में, हमास के फेवर में सहानुभूति रखती है, स्वाभाविक है कि वह कैप्टन स्मित जैसे शूरवीरों के लिए भारत, India माता के वीर पुत्रों के साहस का कद्र नहीं कर सकती. शर्म की बात है कि आज राहुल गांधी जैसे लोग पूरे देश को शर्मसार करते हैं और उनमें इतना भी शिष्टाचार नहीं है कि वे कैप्टन स्मित की बहादुरी की प्रशंसा करें.
उन्होंने कहा कि ये लोग जो हैं, सभी विपक्षी पार्टियों में आपस में एक प्रतिस्पर्धा चल रही है कि कौन कितना ज्यादा विरोध प्रदर्शन कर सकता है? कौन कितना ज्यादा और कितना बड़ा आंदोलन जीवी बन सकता है? कल शिवाजी पार्क में कॉकरोचों द्वारा जो आंदोलन किया गया है, उसकी हकीकत यही है कि वहां के रेसिडेंट्स आंदोलन जीवियों का विरोध करते दिखे और ये कहते हुए देखे गए कि हमारे एरिया की शांति भंग मत करिए. हमारे पास कोई समस्या नहीं है.
तुहिन सिन्हा ने कहा कि यही हाल इन आंदोलन जीवियों का पूरे देश में होने वाला है और राहुल गांधी को देखकर तो बड़ी हैरानी होती है. आज की तारीख में उनका मुकाबला कॉकरोचों से है. अगर कॉकरोच जंतर मंतर में प्रदर्शन करते हैं, तो अगले दिन राहुल गांधी Prime Minister आवास के बाहर पहुंच जाते हैं. अगर कॉकरोच बालाघाट पहुंचते हैं, अगले दिन राहुल गांधी वहां पहुंच जाते हैं.
मुझे लगता है कि आंदोलन करना इन लोगों का एक आदत एक रोग बनता बनता जा रहा है. कहीं न कहीं इस मानसिकता से इनको ऊपर उठना होगा, क्योंकि अब समाज इसको बर्दाश्त नहीं करेगा. समाज में लोग आक्रोशित हो रहे और लोग इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे.
तुहिन सिन्हा ने आगे कहा कि आज ड्रग्स फ्री इंडिया की दिशा में मोदी Government ने एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है. नवप्रीत सिंह विश्व का एक बड़ा नार्को टेररिस्ट है, जो कि नाम बदलकर तुर्की में छुपा था. Saturday को उसका डेपोटेशन सफलतापूर्वक हुआ है. उसको India लेकर आया जा रहा है. गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार स्पष्ट किया है कि दिसंबर 2029 तक पूरी तरह से नारको टेरेरिज्म को India से समाप्त किया जाएगा. उस दिशा में ये यह एक बहुत बड़ा माइलस्टोन है.
नारको टेररिज्म के समाप्त होने के उपरांत 2047 तक India पूरी तरह से नशा मुक्त होगा. जिस तरह से Prime Minister मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सल मुक्त India का एक लक्ष्य दिया था और अपनी दृढ़ता से, दृढ़ संकल्प और कर्मठता से समय पर तरीके से उस लक्ष्य को हासिल किया. उसी तरह से ड्रग्स मुक्त India का लक्ष्य भी बहुत जल्द India हासिल करने वाला है और ये एक बार फिर मोदी Government की पॉलिटिकल विल पावर को दर्शाता है.
बड़ी संख्या में India के युवा ड्रग्स से पीड़ित हैं और नार्को टेररिज्म उसका एक बहुत बड़ा पहलू है. नार्को टेररिज्म समाप्त करने की दिशा में मोदी Government प्राथमिकता के साथ काम कर रही है और उस दिशा में आज की उपलब्धि जो है बिल्कुल सराहनीय है.
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डीके/
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