
Mumbai , 2 नवंबर . वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने Monday को कहा कि Government विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की कैपिटल गेन टैक्स लेकर चिंताओं को सुनेगी और उसके बाद ही कोई फैसला लेगी.
देश की आर्थिक राजधानी में फाइनेंशियल एक्सप्रेस लीडरशिप अवार्ड्स में बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि बाजार में बदले माहौल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने कर ढांचे में बदलाव को मांगों को तेज कर दिया है.
हालांकि, वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि मौजूदा कर ढांचा 2023 में भी वही था, जब India में रिकॉर्ड विदेशी निवेश आया था.
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा,”2023 में भी, जब निवेश का प्रवाह रिकॉर्ड स्तर पर था, तब भी टैक्स का ढांचा वैसा ही था जैसा आज है. आज हालात बदल गए हैं. एफआईआई की निकासी हुई है और चिंताएं भी बढ़ गई हैं. मैं इन सब बातों पर विचार करूंगी.”
वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि Government मौजूदा टैक्स व्यवस्था में कोई भी बदलाव करने से पहले कई पहलुओं पर विचार करेगी और साथ ही वैश्विक निवेशकों द्वारा जताई गई चिंताओं को भी ध्यान में रखेगी.
इसके अलावा वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि टाटा समूह के भीतर चल रहे मुद्दे – जिनमें चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति को लेकर मतभेद और टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग शामिल हैं – आपसी बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिए जाएंगे.
वित्त मंत्री सीतारमण ने इस मामले को एक संवेदनशील मुद्दा बताया, जिसमें महत्वपूर्ण व्यावसायिक और कारोबारी पहलू शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इसे सार्वजनिक रूप से विवाद करने के बजाय संबंधित पक्षों को आपस में सुलझा लेना चाहिए.
भारतीय अर्थव्यवस्था में टाटा समूह के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने समूह की वैश्विक ब्रांड वैल्यू, इसे खड़ा करने में पारसी समुदाय के योगदान और उन विभिन्न क्षेत्रों का जिक्र किया जिनमें टाटा की कंपनियां काम करती हैं.
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “मैं टाटा की ब्रांड वैल्यू और इसे एक बड़ा वैश्विक ब्रांड बनाने में पारसी समुदाय के योगदान को जानती हूं. मुझे यह भी पता है कि टाटा समूह किन-किन क्षेत्रों में सक्रिय है. इसलिए, यह भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बहुत ही अहम हिस्सा है और इसे दोनों पक्षों को आपसी सहमति से सुलझा लेना चाहिए.”
वित्त मंत्री ने सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करने और जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि इतने बड़े संस्थान के लिए लंबे समय तक सार्वजनिक विवाद चलना बिल्कुल भी ठीक नहीं है.
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एबीएस/
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