कैट की एलजी से अपील, प्रदर्शनों से बाधित हो रहा व्यापार; दिल्ली के बाहरी इलाकों में बनाए प्रदर्शनस्थल

New Delhi, 2 नवंबर . कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने Monday को दिल्ली के उपGovernor (एलजी) से आग्रह किया है कि वे राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाकों में विरोध-प्रदर्शनों के लिए आधिकारिक जगह तय करें, क्योंकि इनके बार-बार होने से व्यावसायिक गतिविधियों, लोगों की आजीविका और आम जनजीवन पर बुरा असर पड़ता है.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने उपGovernor को लिखे पत्र में दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर विरोध-प्रदर्शनों और Political गतिविधियों के कारण बार-बार होने वाली बाधाओं का जिक्र किया.

इसमें उपGovernor से हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों, जनसभाओं, प्रदर्शनों और Political आयोजनों के लिए उपयुक्त जगहों की पहचान करें और उन्हें अधिसूचित करें.

व्यापारी संगठन ने कहा कि पिछले एक महीने से भी अधिक समय से दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों और Political गतिविधियों के कारण रुक-रुक कर लेकिन लगातार व्यवधान आ रहे हैं, जिससे बाजार, कारोबार और नागरिकों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है.

पत्र में कहा गया है, “हालांकि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हमारे लोकतांत्रिक ढांचे का एक अहम हिस्सा है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि इस अधिकार का इस्तेमाल करते समय दूसरे नागरिकों के अधिकारों और उनकी आजीविका का हनन न हो.”

पत्र में कहा गया है कि विरोध करने का अधिकार शहर को ठप करने का अधिकार नहीं बन सकता, ठीक वैसे ही जैसे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का इस्तेमाल करते समय व्यापार करने के अधिकार की बलि नहीं दी जा सकती.

कैट ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली India के सबसे बड़े व्यापारिक, थोक और वितरण केंद्रों में से एक है, जहां हजारों बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान लाखों लोगों की आजीविका का जरिया हैं.

इसमें कहा गया है कि बार-बार होने वाली रुकावटों से न केवल व्यापारी और दुकानदार प्रभावित हुए हैं, बल्कि रेहड़ी-पटरी वाले, फेरीवाले, दिहाड़ी मजदूर, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, कर्मचारी, डिलीवरी करने वाले लोग और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठान भी प्रभावित हुए हैं.

संगठन ने बताया कि ट्रैफिक डायवर्जन, सड़कों की नाकेबंदी और व्यावसायिक इलाकों तक पहुंच सीमित होने के कारण, देश के अन्य हिस्सों से आने वाले व्यापारियों और कारोबारियों ने दिल्ली आना कम कर दिया है. इसका असर व्यापारिक लेन-देन पर पड़ा है और सप्लाई चेन भी बाधित हुई है.

एक स्थायी समाधान की मांग करते हुए, कैट ने पांच उपाय सुझाए हैं. इनमें विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहें घोषित करना, व्यावसायिक और बाजार क्षेत्रों की सुरक्षा, लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनाना, लोगों की रोजी-रोटी की सुरक्षा करना और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना शामिल है.

संगठन ने सुझाव दिया कि दिल्ली Police, ट्रैफिक Police, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि विरोध-प्रदर्शन इस तरह से हों कि आम जनता को कोई परेशानी न हो और आर्थिक गतिविधियां भी न रुकें.

कैट ने स्पष्ट किया कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित नहीं करना चाहते, बल्कि उनकी चिंता यह है कि विरोध-प्रदर्शनों की वजह से राष्ट्रीय राजधानी का आर्थिक जीवन पूरी तरह ठप न हो जाए.

पत्र में कहा गया है, “संविधान शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने की आजादी देता है. साथ ही, यह किसी भी पेशे को अपनाने या व्यापार करने का अधिकार भी देता है, जिस पर जनहित में उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. इन दोनों सिद्धांतों की सुरक्षा इस तरह से की जानी चाहिए कि दोनों के बीच संतुलन बना रहे.”

व्यापारी संगठन का कहना है कि विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहें होने से एक संस्थागत समाधान मिलेगा, जिससे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और आर्थिक गतिविधियों को चलाने, दोनों काम बिना किसी टकराव के साथ-साथ हो सकेंगे.

उन्होंने उपGovernor से आग्रह किया कि वे इस प्रस्ताव पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करें और दिल्ली के बाहरी इलाकों में विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त जगहें तय करने की प्रक्रिया शुरू करें.

कैट ने उपGovernor से मुलाकात करने की इच्छा भी जताई है, ताकि वे शहर के व्यापारी समुदाय की चिंताओं और सुझावों को विस्तार से उनके सामने रख सकें.

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एबीएस